आराधना चतुर्वेदी ’मुक्ति’
कुछ यादें... कुछ बातें... कुछ अनुभव... कुछ विचार... वादों-विवादों से परे...!
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Monthly Archives: जनवरी 2010
मिट्टी का घर, आम का पेड़, झूले, कजरी…सब बीती बातें
मेरे गाँव में बरसों पहले हमारा एक मिट्टी का घर था. आँगन, ओसार, दालान और छोटे-छोटे कमरों वाले उस बड़े से घर से धुँए, सौंधी मिट्टी, गुड़(राब) और दादी के रखे- उठे हुए सिरके की मिली-जुली गंध आती थी. घर … Continue reading
Posted in यादें
Tagged आम का पेड़, गाँव, घर, झूले, मिट्टी का घर, यादें, सोंधी खुशबू, natural beauty
23s टिप्पणियाँ
फिर एक इंतज़ार
तुम क्यों आते हो?? तुम्हारे आने के साथ आता है डर तुम्हारे जाने का, मैं भी कितनी पागल हूँ… कि तुम्हारे आने से पहले तकती हूँ राह तुम्हारी, और करती हूँ घण्टों इंतज़ार… और तुम्हारे आने के बाद हो जाती … Continue reading
गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!
अक्सर यह बात उठती है कि आखिर हम वर्ष में सिर्फ़ एक या दो बार अपने देश की सुध क्यों लेते हैं? बात यह नहीं है कि हम सिर्फ़ एक दिन क्यों याद करते हैं अपने देश को, देश पर न्योछावर होने … Continue reading
जयपुर सिटी पैलेस
पिछले दिनों एक कान्फ़्रेन्स में जयपुर जाना हुआ. समयाभाव के कारण पूरा शहर तो घूम नहीं पायी, पर मशहूर सिटी पैलेस देखा. कुछ तस्वीरें पोस्ट कर रही हूँ.
बया का घोंसला
कहते हैं कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है, पर मेरा खाली दिमाग तो रचनात्मक ऊर्जा से भर जाता है. कभी किसी गम्भीर विषय पर चिन्तन करने लगता है, तो कभी यादों के गलियारों में भटकने लगता है. कल … Continue reading
गाँव की सर्दियाँ
दिल्ली की सर्दी भी हाड़ कँपा देने वाली होती है. कोहरा, धुन्ध और ठन्डी हवाओं से बचने के कुछ ही उपाय होते हैं- रजाई, चाय और हीटर. पर इस बार फिर मुझे गाँव की सर्दियों की बहुत याद आ रही … Continue reading







