Monthly Archives: फ़रवरी 2010

एक सुबह, एक शाम, एक रात

एक सुबह, बांस की पत्ती के कोने पर अटकी ओस की बूँद कैद कर ली थी, आँखों के कैमरे में आज भी कभी-कभी वो बंद पलकों में उतरती है, … … एक शाम, पक्षियों के कलरव को सुना था बैठकर … Continue reading

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संगम-तट की रेत पर दो जुड़वा पैरों के निशान

ना जाने क्यों, जीवन में कभी-कभी कोई दोस्त अचानक से ख़ास बन जाता है. वो दोस्त, जिससे हम रोज़ मिलते हैं, बातें करते हैं, घूमते-फिरते हैं और अपने अनुभव बाँटते हैं, किन्हीं कोमल क्षणों में वो कुछ और ही हो … Continue reading

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एक छूटी हुई बात…

कुछ दिनों पहले मैंने एक पोस्ट लिखी थी अपने नाम के संबंध में. उसे बहुत लोगों ने पढ़ा और टिप्पणियाँ भी दीं. मैं यहाँ यह बात बताना चाहती हूँ कि उस पोस्ट में एक बहुत महत्त्वपूर्ण बात छूट गयी थी. … Continue reading

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काहे को ब्याहे बिदेस

मेरे जीवन की कुछ घटनाएँ ऐसी हैं, जिन्हें अच्छी या बुरी की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, पर उन्होंने मेरे मन पर ऐसी अमिट छोड़ी है कि जब भी याद आती है, तो एक टीस सी उठती है. मेरी माँ की … Continue reading

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मेरा नाम आराधना है…अनुराधा नहीं

मैंने सोचा था कि यह एक-दो जगह की बात है, पर मैं बहुत दुःखी हो चुकी हूँ, हर जगह अपना नाम अनुराधा लिखा पाकर. इसीलिये मुझे यह पोस्ट लिखनी पड़ रही है. मैं सभी ब्लॉगर बंधुओं से अनुरोध करती हूँ … Continue reading

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फागुन में बरसात

ये कोई अच्छी बात थोड़े ही है. अच्छी ख़ासी फगुनहट चल रही थी. मौसम में मस्ती की फ़ुहार थी. थोड़ा-थोड़ा आलस ज़रूर था, लेकिन कुल मिलाकर शिशिर की जड़ता समाप्त होने को थी. ब्लॉग-फाग छाया हुआ था. सब कुछ ठीक … Continue reading

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“…कचौड़ी गली सून कईलैं बलमू”

आजकल ब्लॉगजगत में फागुन आया हुआ है. कुछ लोगों ने तो अपने ब्लॉग पर चेतावनी भी लगा रखी है कि भई संभल के टिप्पणी देना, इस ब्लॉग पर फागुन आया है. पर, मेरा मन इन दिनों एक कजरी पर अटका … Continue reading

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