Monthly Archives: मई 2010

अब सब कुछ पहले जैसा है

अब किसी पड़ोसी को इस बात की शिकायत नहीं होगी कि उसने छत पर सूखने के लिए टंगे कपड़ों को खींचकर ज़मीन पर गिरा दिया , कि उसने उनके कमरे के सामने पोटी या सुसु कर दी, अब किसी को … Continue reading

Posted in यादें | Tagged , , | 36s टिप्पणियाँ