Monthly Archives: फ़रवरी 2011

वो ऐसे ही थे (2.)

मेरे बाऊजी मार्क्स के विचारों से बहुत प्रभावित थे. लेकिन वे जितने बड़े प्रशंसक मार्क्सवाद के थे, उतना ही उन्हें व्यक्तिगत स्वतंत्रता से लगाव था. ये दोनों ही परस्पर विरोधी विचार मझे विरासत में मिले हैं. जब हम बहुत छोटे … Continue reading

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एक बैचलर का कमरा, धुआँ और दर्शन

१. कमरे का एक कोना. ज़मीन पर बिछा बिस्तर. उसके बगल में फर्श पर राख से पूरी भरी हुयी ऐश ट्रे और उसमें जगह न पाकर इधर-उधर छिटकी अधजली सिगरटें. एक कॉफी मग, जिसमें एक तरफ  रखी हुयी इमर्सन राड. … Continue reading

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