दो-तीन दिन पहले फेसबुक पर एक मजेदार चीज़ देखी. उसमें लिखा था कि कुछ रिश्ते ‘टॉम एंड जेरी’ जैसे होते हैं. एक-दूसरे को चिढ़ाते हैं, तंग करते हैं, खिंचाई करते हैं, शिकायत करते हैं, लेकिन एक-दूजे के बगैर रह भी नहीं पाते. मुझे लगता है भाई-बहन के अलावा ऐसा रिश्ता सिर्फ़ दोस्तों में होता है. फिर एक चीज़ लहरें वाली पूजा ने शेयर की कि ‘दोस्त कितना भी रूठें, उन्हें मना लेना चाहिए क्योंकि वे कमीने हमारे सारे राज़ जानते हैं.’
मेरे दोस्तों ने मेरी समस्याओं में हमेशा मेरा साथ दिया है और मुझे विश्वास है कि आगे भी देते रहेंगे
वैसे तो मैं समस्याओं से भरसक दूर रहने की कोशिश करती हूँ, पर गाहे-बगाहे वो मुझे ढूँढ ही लेती हैं. पता नहीं उनको मुझसे इतना लगाव क्यों है, जबकि वो जानती हैं कि मुझे दुखी रहना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता. शायद वो भी यही चाहती हैं कि मेरे दोस्त मेरे आस-पास रहें
दोस्तों का आस-पास रहना किसे खराब लगता है, पर जब दोस्त ऐसे हों तो…???
एक दिन मैं एक एक्शन फिल्म देख रही थी. बड़ा ही इंट्रेस्टिंग सीन चल रहा था. प्लेन में कुछ खराबी आ गयी थी. पायलट मर गया था. हीरो, जो कि प्लेन उड़ाना नहीं जानता था, हिरोइन की मदद से प्लेन को क्रैश होने से बचाने की कोशिश में लगा था. प्लेन कभी दायें मुड़ता, कभी बाएं. मैं सांस रोककर मूवी देख रही थी…तभी मेरा दोस्त मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया. थोड़ी देर तक देखता रहा. फिर बोला “तुम इतने ध्यान से क्या देख रही हो? ये सब सच का थोड़े ही है. स्टूडियो में सेट लगाकर पीछे स्क्रीन भगाकर बेवकूफ बनाते हैं हालीवुड वाले” कर दिया कचरा पूरी फिल्म का. और जब मैंने घूरकर देखा, तो कंधा उचकाकर, मुँह बिचकाकर बोला “हमें क्या? देखो फिल्म . करो अपना समय बर्बाद.” अब ज्ञान चक्षु खोलने वाली इतनी महत्त्वपूर्ण जानकारी के बाद कोई फिल्म देखने की ज़हमत उठा सकता था क्या? और तो और, तबसे मैं जब भी फिल्म में ऐसे सीन देखती हूँ, उसकी बात याद आ जाती है और फिल्म देखने का मज़ा किरकिरा हो जाता है.
दोस्त ऐसे ही होते हैं. थोड़े समय के लिए आते हैं और लंबा असर देकर जाते हैं. माँगो या ना माँगो, सलाह ज़रूर देने लग जाते हैं. याद दिलाते रहते हैं कि उन्होंने सलाह देकर हमारे ऊपर कितना बड़ा एहसान कर दिया है. और अगर उनकी सलाह ना मानो (जैसा कि सौ में से निन्यानवे बार होता है) तो काम बिगड़ने पर इतना सुनाते हैं कि पूछो मत “देखा मेरा कहा नहीं माना ना तुमने, लो भुगतो”
मुझे पता है मेरे दोस्त मेरे फिल्मप्रेम और कुत्ताप्रेम से कितना परेशान रहते हैं (वैसे मेरे ऊपर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता) मेरा एक दोस्त जब मेरे घर आने वाला होता है, तो पहले पूछता है “तुम्हारी कुतिया होगी ना” अब बताओ मैं उसे कहाँ भेज दूँ? पर इमेजिन, कैसा लगता होगा जब आपके प्यारे-दुलारे, क्यूटी पाई, कुच्चू-मुच्चू पिल्ले को कोई ‘कुतिया’ कहे :( पर कहता है ना. कोई बात नहीं. दोस्ती में ये सब चलता है. लेकिन फिल्म के बीच-बीच में कमेंट्री
किसी को बर्दाश्त हो सकती है क्या? पर एक दोस्त ये भी करता है. मुझे वो दिन याद आ जाते हैं, जब हमलोग हॉस्टल के टी.वी. हाल में कमेंट्री कर-करके दूसरों का फिल्म देखना मुश्किल कर देते थे. ऊपर वाला सब देखता है. मुझे ज़रूर उन्हीं कर्मों की सज़ा मिल रही है
एक और मित्र हैं. इस समय सरकार की बड़ी अफसरी की ट्रेनिंग कर रहे हैं. मिजाज़ से साहब बहादुर हैं. सर्दी-गर्मी उन्हें बर्दाश्त नहीं होती और बरसात में गल जाने के डर से बाहर नहीं निकलते
पर बेचारे दिल से एकदम बच्चे हैं. कुछ साल पहले मैं एक कांफ्रेंस में बनारस गयी हुयी थी. वहाँ गुजरात की प्रोफेसर्स के साथ कमरा शेयर करना पड़ रहा था. वैसे तो वो मैडम लोग बड़ी मजाकिया थीं, लेकिन उम्र का फासला होने के कारण मुझे थोड़ा अटपटा लगता था. उस पर भी मेरे इन दोस्त ने मुझे रात में एक बजे फोन किया. कमरे में मौजूद और लोगों की नींद ना खराब हो, इसलिए मैं रजाई के अंदर मुँह करके बात करने लगी. सोचा था कि जनाब को कोई ज़रूरी काम होगा, लेकिन पता चला कि साहब बहादुर की ड्यूटी चुनाव के चक्कर में फतेहपुर जिले के किसी इंटीरियर में लग गयी थी. वहाँ ना बिजली थी और ना मनोरंजन का और कोई साधन. साहब बहादुर बोर हो रह थे, इसलिए मेरी नींद खराब कर रहे थे. आखिर में समझा-बुझाकर फोन रखवाया कि देखो मेरे साथ के और लोगों को समस्या होगी. दूसरे दिन सुबह मैडम लोग मुस्कुराकर पूछने लगीं ‘किसका फोन था?’ जब मैंने कहा ‘दोस्त का’ तो बोलीं ‘चल हट! बेवकूफ बनाती है. दोस्त से कोई रजाई में छिपकर बात करता है क्या?’ मैंने अपना सर पीट लिया. मेरी अच्छी-खासी सीरियस इमेज का बंटाधार हो गया. साहब बहादुर को फोन करके हड़काया, तो बच्चों की तरह ही-ही करने लगे.
तो ऐसे हैं हमारे दोस्त लोग. और भी कई किस्से हैं, पर और कभी. इन सारे दोस्तों की सारी बदमाशियाँ, ज्यादतियाँ सह लेती हूँ. डाँटती हूँ, फिर मना लेती हूँ. करना ही पड़ता है. वो हमारे सारे राज़ जो जानते हैं












