Monthly Archives: सितम्बर 2012

खुरपेंचें, खुराफातें…पीढ़ी दर पीढ़ी

जी, खुरपेंची होना हमारे बैसवारा की सबसे बड़ी विशेषता है. बड़े-बड़े लम्बरदार भी इससे बाज नहीं आते. बचपन से ऐसी खुराफातें देखकर बड़ी होने के बाद भी मैं इतनी सीधी (?) हूँ, इससे सिद्ध होता है कि वातावरण हमेशा ही … Continue reading

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सुनहरी धूप

मुझे नहीं पता कि मैं कैसे उससे इतनी बातें कह गयी. माना कि मेरा बहुत अच्छा दोस्त है, पर मैं जल्दी किसी के आगे भावुक नहीं होती. बहुत दुखी होती हूँ, तो भी नहीं. मैं कहती ज़रूर हूँ अपनी बातें, … Continue reading

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