About
i have done my D.Phil. in SANSKRIT from Allahabad University and now doing post doctoral research from JNU.
i am a cool Hindi blogger writing on feminist ideology. i have already two blogs in blogosphere related to feminist ideology, but this blog is personal. in this blog i will share my memories, thoughts, experiences and ideas freely.

मेरे बारे में और कुछ…
मैं क्या हूँ?? पता नहीं… अपनी खोज में लगी हुयी हूँ…शायद हम सभी खुद को ढूँढ़ने में लगे हुये हैं. ज़िन्दगी के किसी मोड़ पर, किसी से मिलकर या किसी घटना के समय, हमें खुद अपना ही अन्जाना चेहरा दिख जाता है और तब हम सोचते हैं कि क्या ये हम ही हैं?…तो कोई भी नहीं कह सकता कि वह है कौन? मैं नहीं जानती कि मेरी जीवन-यात्रा का गन्तव्य कहाँ है? पर, मैं ये जानती हूँ कि मुझे क्या करना है…और क्या नहीं करना है? तो कर्म कर रही हूँ…निरन्तर…
मैं बहुत सीधी हूँ. मतलब स्ट्रेट फ़ारवर्ड. मैं दुनिया के उन नमूनों में से एक हूँ, जो आजकल की दुनिया में भी सच्चाई, ईमानदारी, निष्ठा, प्रेम और विश्वास पर विश्वास करते हैं. मैं बहुत ईमानदार हूँ और भरसक झूठ बोलने से बचती हूँ.
रुचियाँ- मेरी रुचियाँ बहुत सी हैं. मुझे स्केचिंग और पेंटिंग (ऑयल, वाटर और फ़ैब्रिक) करना अच्छा लगता है, गाने सुनना और गाना, घर की सफाई और सजावट करना, घुमक्कड़ी, और सबसे अधिक पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है. इसके अलावा फ़ोटोग्राफी करना अच्छा लगता है, पर कैमरा उधार लेना पड़ता है.
किताबें- हर तरह की किताबें मुझे अच्छी लगती हैं. किताबें देखकर मैं खुश हो जाती हूँ. मैंने अपने शोध के समय संस्कृत के लगभग सभी पुराने नाटक और साठ के लगभग आधुनिक नाटक पढ़े हैं. मुझे “अभिज्ञान शाकुन्तलम्” सबसे अधिक पसंद है. हिन्दी साहित्य पढ़ना अच्छा लगता है, पर समय ही नहीं मिलता. फिर भी कुछ किताबें पढ़ी हैं, जिनमें मुझे प्रेमचन्द की “गोदान” और”निर्मला” और श्रीलाल शुक्ल की “रागदरबारी” पसंद आयीं. मुझे शरतचन्द के उपन्यास बहुत अच्छे लगते हैं. पुष्पा मैत्रेयी, महाश्वेता देवी के भी कुछ उपन्यास अच्छे लगते हैं.
मुझे नारीवादी विचारधारा में रुचि है, मुख्यतः इस बात में महिला-सशक्तीकरण के इतने प्रयासों के बाद भी कौन से कारण हैं, जिनके कारण औरतों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है. मैं इसी विषय पर शोध करना चाहती हूँ और कर भी रही हूँ. तो इस समय इससे सम्बन्धित पुस्तकें पढ़ रही हूँ.
फ़िल्में- मुझे लगभग सारी पुरानी हिन्दी फ़िल्में पसंद हैं. विशेषकर गुरुदत्त, व्ही. शांताराम, बिमल राय, बी.आर.चोपड़ा, हृषिकेश मुखर्जी, बासु चटर्जी और गुलज़ार की फ़िल्में. हिन्दी की ऑफ़बीट फ़िल्में और आजकल के फ़िल्मकारों में आशुतोष गोवरीकर, प्रकाश झा, मधुर भंडारकर आदि की फ़िल्में. इसके अतिरिक्त हॉलीवुड की साइंस फ़िक्शन, सुपरनेचुरल हॉरर, रोमैंटिक कॉमेडी और कुछ ऐक्शन फ़िल्में अच्छी लगती हैं. मुझे पुरानी नायिकाओं में नूतन, मीना कुमारी और मधुबाला पसंद हैं. मेरे मनपसंद नायक हैं बलराज साहनी, दिलीप कुमार, संजीव कुमार और नसीरुद्दीन शाह.
संगीत- पुराने फ़िल्मी गाने. विशेषतः मदन मोहन, नौशाद, एस.डी. बर्मन, ओ.पी.नैयर, सलिल चौधरी, रवी, हेमंत कुमार और खैय्याम के निर्देशन वाले गाने. मुझे मोहम्मद रफ़ी, एस.डी. बर्मन, तलत महमूद, हेमंत कुमार और मन्ना डे की आवाज़ बहुत पसंद है. गायिकाओं में गीता दत्त, शमशाद बेग़म, आशा भोंसले की आवाज़ें अच्छी लगती हैं. कुछ सुरैया और मलिका-ए-तरन्नुम नूरजहाँ के गाने भी. इसके अतिरिक्त सूफ़ी (नुसरत, आबिदा बेग़म और कैलाश खेर), ग़ज़लें ( ग़ुलाम अली, फ़रीदा खानम और जगजीत सिंह) मलिका पुखराज के गाने भी पसंद हैं, विशेषकर उनकी आवाज़. वर्तमान में ए.आर.रहमान का संगीत अच्छा लगता है.
दीवानगी- मैं पपीज़ की दीवानी हूँ. जब हम छोटे थे तो कहीं भी पिल्ला देखते थे तो उसे घर उठा लाते थे. अब ऐसा नहीं कर सकती हूँ, पर फिर भी जहाँ भी पपी देखती हूँ, मेरे कदम ठिठक जाते हैं. इसके अलावा मैं क्रेज़ी हूँ स्टेशनरी की और प्राकृतिक दृश्यों की.
…शायद… इतना काफ़ी होगा मुझे समझने के लिये.
Like this:
Like Loading...
good
Great
Hi,
Just read some of your poems in the other blog and I would like to say that the whole sea of imagination is different while the way you paint your thoughts is more inspiring and creatively on the higher altitude.
Deepak
Dear Aradhna D I have read your “GAOWN KI SHARDIYAN, PASINA & GAOWN KI MITTI”. I really got impressed. D D I m a new user of any blog, will u be my friend, will u help me?
” WILL YOU BE MY DD………..! ”
Shailesh
rr1812@gmail.com
Dear Aradhna D D I have read Your gaown ki shrdiyan Pasina & gaown ki mitti your blog is very Nise.
I want to your Help for my blog.I want My Self wirte my blog in Hindi.
My Email
sunil4u79@gmail.com
क्या आप मैरे एक प्रशन का उत्तर देंगी–
आप दुनिया की सच्चाई किसकों मानती हैं ?
(A) भौतिकवाद को या
(B) आध्यात्मिकता को
यह प्रशन मैने आपसे इस लिये पुछा- क्योकि आप भौतिकवादी जीवन मे आध्यात्मिकता को तलाश कर रहे हैं…… जो विरले ही मिलते हैं
और आध्यात्मिकता को अन्तिम सच्चाई मानते हैं तो…आध्यात्मिकता कि प्राकाष्टा क्या हैं ……. ?????
बहुत खूब!
aapne sabkuchh mention kiya par Pyaar ke bare me kuchh nahi…..Naari ka yeh bhi to ek sunahra pahlu hai…..
that is some personal. isn’t it?
http://views24hours.com/blogs.php?id=79&mid=11
विचारों के आदान-प्रदान में सहयोग रखें..
सादर
I visited your blog and found it to be having the same theme as mine. Good place. Subscribing you. Best.
madam , bahot accha laga aap ke bare me padh kar,
lekin shayad aap apne life me kuch galat kar rahi hai , jo ki aap apne aap ko ab tak samaz nahi paayi ho.
please kya aap muzse kuch baat cheet kar sakti hai,
agar ha to please muze mail kare
बहते अश्को की ज़ुबान नही होती,
लफ़्ज़ों मे मोहब्बत बयां नही होती,
मिले जो प्यार तो कदर करना,
किस्मत हर कीसी पर मेहरबां नही होती.
अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना ,
हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।
उड़ना हवा में खुल कर लेकिन ,
अपने कदमों को ज़मी से मिला कर रखना ।
छाव में माना सुकून मिलता है बहुत ,
फिर भी धूप में खुद को जला कर रखना ।
उम्रभर साथ तो रिश्ते नहीं रहते हैं ,
यादों में हर किसी को जिन्दा रखना ।
वक्त के साथ चलते-चलते , खो ना जाना ,
खुद को दुनिया से छिपा कर रखना ।
रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी ,
अपने चेहरे को दोस्तों से छिपा कर रखना ।
तुफानो को कब तक रोक सकोगे तुम ,
कश्ती और मांझी का याद पता रखना ।
हर कहीं जिन्दगी एक सी ही होती हैं ,
अपने ज़ख्मों को अपनो को बता कर रखना ।
मन्दिरो में ही मिलते हो भगवान जरुरी नहीं ,
हर किसी से रिश्ता बना कर रखना/
जब हम छोटे थे तो कहीं भी पिल्ला देखते थे तो उसे घर उठा लाते थे. अब ऐसा नहीं कर सकती हूँ, पर फिर भी जहाँ भी पपी देखती हूँ, मेरे कदम ठिठक जाते हैं
ha ha ha
mujhe bhi apna time yaad aagya
papa se bahut daant khaya hoon iske liye
dear anuradha
aapka gavan ke prati lagav aur un sabdon ka prayog men lana bahut achha laga
अनुराधा जी
इन दिनों जब भी फुर्सत मिलती है, आपके ब्लॉग को खोलती हंू। अभिव्यक्ति में सोंधापन है।
अगर आपको फोटोग्राफी का शैक है तो अपना ही खरीद लिजिए, वह कहते है न अगर मुर्गा खाना हो तो मुर्गा पाल लो अगर ताजा दुध पीना हो तो गाय पाल लो.
Its an beautiful blog that you have got. Keep writing, not many write such, straight from heart posts.
Nice Expressions Aradhana..
Your journey of searching self is unique and interesting. You may like to visit AD’s blog.. on http://agyaatdarshan.wordpress.com , I am sure you will like this contemporary master’s views and methods.
Shall keep visiting your website.. it has an aroma of its own kind. I loved it…
- Shashi
मैं तो पूछने वाला था कि आपके पास कैमरा कौन सा है। पर आपने तो पहले ही बतला दिया कि उधार लेना पड़ता है। पर उधार ले लेकर मालूम तो हो गया होगा कि कौन सा कैमरा धार वाला है। मतलब कीमत कम और क्वालिटी अधिक। प्रतीक्षा रहेगी आपके प्रत्युत्तर की।
कई फोटो तो मेरे मोबाइल कैम से ली गयी हैं. कैमरों के बारे में अभी बहुत अधिक ज्ञान नहीं हो पाया है. दूसरों से कैमरा कभी-कभी ही लेती हूँ .
suvalal ji ki tippani par:
जब आराधना ने कहा है:
“में बहुत सीधी हूँ. आजकल की दुनियां में भी सच्चाई,
ईमानदारी, निष्ठा, प्रेम ओर विश्वास पर विश्वास करती हूँ.
में बहुत ईमानदार हूँ ओर भरसक झूठ बोलने से बचतीं हूँ.”
सुवालाल जी, आराधना को “भौतिकवाद-आध्यात्मिक्वाद” में
उतरने ki ज़रुरत है क्या ? कबीरदास ने ही कहा है:
“साधो (या साधु ) सहज समाधी भली”.
कबीरदास ने ही एक ओर जगह पर कहा है:
“तन मटकी मन दहीं सूरत बिलोवन्हार
कबीरा माखन खा गया छाश पिए संसार” (दुहे में गलती सुधार
के साथ, पर भाव यही है)
very nice
जान कर सच में ख़ुशी हुई कि आप हिंदी भाषा के उद्धार के लिए तत्पर हैं | आप को मेरी ढेरों शुभकामनाएं | मैं ख़ुद भी थोड़ी बहुत कविताएँ लिख लेता हूँ | हाल ही में अपनी किताब भी प्रकाशित की | आप मेरी कविताएँ यहाँ पर पढ़ सकते हैं- http://souravroy.com/poems/
हैलो आराधना जी
काफी समय से आपका ब्लॉग पढ़ता रहा हू
पहली बार कमेंट दे रहा हूँ
आपकी रचनाएं बहुत पसंद आती हैं और आपकी चित्रा कला भी बढ़िया है
आपने लिखा की आपको स्टेशनरी पसंद है इसलिये ये लिंक दे रहा हूँ जा कर देखिएगा
http://www.fountainpennetwork.com/forum
ऐसे ही लिखती रहें शुभकामनाएं
you got a very superb website, Sword lily I discovered it through yahoo.
I like your writing so much! I`m performer doing Zauberei and I wanna thank u. You have ended my four day long hunt!
plz post me notes on mahasweta devi ki visheshtayein
आपने पियूष मिश्र को जरूर सुना होगा लेकिन शायद नोटिस न किया हो , उनको सुनियेगा |
‘आरम्भ है प्रचंड’ वाले |
उनका एक गाना है जिसे किसी फिल्म में इस्तेमाल नहीं किया गया , लिंक देता हूँ -
सुना है. खूब सुना है और ये गाना गुलाल फिल्म का है, जिसे मैं दो बार देख चुकी हूँ.