Category Archives: किस्सा-कहानी

कक्कू

पागल लोग होते हैं ना, उनका पाला ज़िंदगी में पागल लोगों से ही पड़ता है. मैं पागल हूँ, तो पागल लोग ही मिलते हैं. वो भी ऐसा ही है-कक्कू. खुद को वेल्ला कहने में ज़रा सी भी शर्म नहीं आती … Continue reading

Posted in किस्सा-कहानी, fiction | Tagged , , | 7s टिप्पणियाँ

बीमारी

सुयश जॉगिंग करते हुए लगातार ऋचा के बारे में सोच रहा था. पिछले कुछ दिनों से वो बीमार सी दिख रही थी. हमेशा खिले-खिले चेहरे वाली तेज-तर्रार लड़की अचानक से निश्तेज लगने लगी थी. सुयश ने कई बार सोचा कि … Continue reading

Posted in किस्सा-कहानी, fiction | Tagged , , | 12s टिप्पणियाँ

आदत

उस घर में सिर्फ एक कमरा था, जिसमें एक रोशनदान था, एक खिड़की और एक ही दरवाजा. खिड़की के उस ओर दूसरी बिल्डिंग की दीवार होने की वजह से उससे उतनी रोशनी नहीं आती थी, जितनी आनी चाहिए. रोशनदान से … Continue reading

Posted in किस्सा-कहानी, fiction | Tagged , , | 26s टिप्पणियाँ

खुरपेंचें, खुराफातें…पीढ़ी दर पीढ़ी

जी, खुरपेंची होना हमारे बैसवारा की सबसे बड़ी विशेषता है. बड़े-बड़े लम्बरदार भी इससे बाज नहीं आते. बचपन से ऐसी खुराफातें देखकर बड़ी होने के बाद भी मैं इतनी सीधी (?) हूँ, इससे सिद्ध होता है कि वातावरण हमेशा ही … Continue reading

Posted in किस्सा-कहानी, यादें | Tagged , , , | 31s टिप्पणियाँ

चाकू (एक कहानी )

किसी शहर में एक लड़की अपने पिता के साथ रहती थी. लड़की का पिता था तो किसी फैक्ट्री में चौकीदार, पर उसे लोहारगिरी का शौक था.  वो तरह-तरह के औजार और हथियार बनाता रहता. कुल्हाड़ी, फावड़े, छेनी, हथौड़ी, आरी और … Continue reading

Posted in किस्सा-कहानी, fiction | Tagged , , , , , , | 26s टिप्पणियाँ

किस्सा नखलऊवा का…

नखलऊवा की कहानी में मैंने अपनी ओर से कोई मिलावट नहीं की है. ये ऐसे ही मिली थी मुझे मय नमक-मिर्च और बैसवारे के आमों से बने अमचूर पड़े अचार की तरह, चटपटी और जायकेदार. इसका महत्त्व इस बात में … Continue reading

Posted in किस्सा-कहानी, यादें | Tagged , , , | 42s टिप्पणियाँ

छुअन के चार पड़ाव

पहला पड़ाव मेरा जन्मदिन. हम दिन भर घूमे थे. शाम को हॉस्टल के गेट पर खड़े होकर बातें कर रहे थे. मेरा मन नहीं हो रहा था कि तुम्हें छोड़कर अंदर जाऊँ. शाम का धुँधलका, गुलाबी ठण्ड. तभी हल्की हवा … Continue reading

Posted in किस्सा-कहानी, fiction | Tagged , , , , , | 43s टिप्पणियाँ