आराधना चतुर्वेदी ’मुक्ति’
कुछ यादें... कुछ बातें... कुछ अनुभव... कुछ विचार... वादों-विवादों से परे...!
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Category Archives: fiction
कक्कू
पागल लोग होते हैं ना, उनका पाला ज़िंदगी में पागल लोगों से ही पड़ता है. मैं पागल हूँ, तो पागल लोग ही मिलते हैं. वो भी ऐसा ही है-कक्कू. खुद को वेल्ला कहने में ज़रा सी भी शर्म नहीं आती … Continue reading
लिखि लिखि पतियाँ
सुनो प्यार, तुमने कहा था जाते-जाते कि शर्ट धुलवाकर और प्रेस करवाकर रख देना। अगली बार आऊंगा तो पहनूँगा। लेकिन वो तबसे टंगी है अलगनी पर, वैसी ही गन्दी, पसीने की सफ़ेद लकीरों से सजी। मैंने नहीं धुलवाई। उससे तुम्हारी … Continue reading
बीमारी
सुयश जॉगिंग करते हुए लगातार ऋचा के बारे में सोच रहा था. पिछले कुछ दिनों से वो बीमार सी दिख रही थी. हमेशा खिले-खिले चेहरे वाली तेज-तर्रार लड़की अचानक से निश्तेज लगने लगी थी. सुयश ने कई बार सोचा कि … Continue reading
आदत
उस घर में सिर्फ एक कमरा था, जिसमें एक रोशनदान था, एक खिड़की और एक ही दरवाजा. खिड़की के उस ओर दूसरी बिल्डिंग की दीवार होने की वजह से उससे उतनी रोशनी नहीं आती थी, जितनी आनी चाहिए. रोशनदान से … Continue reading
दर्दे-ए-हिज्र बेहतर है फिर तो तेरे पास होने से
… मुझे तारीखें याद नहीं रहतीं. पिछली दफा तुम किस तारीख को आये, कब गए, अगली बार कब आओगे, कुछ भी नहीं. मैं कैलेण्डर के पन्ने नहीं पलटती, जिससे तुम्हारे जाने का दिन याद रहे… और जब तुम आते हो, … Continue reading
चाकू (एक कहानी )
किसी शहर में एक लड़की अपने पिता के साथ रहती थी. लड़की का पिता था तो किसी फैक्ट्री में चौकीदार, पर उसे लोहारगिरी का शौक था. वो तरह-तरह के औजार और हथियार बनाता रहता. कुल्हाड़ी, फावड़े, छेनी, हथौड़ी, आरी और … Continue reading
Posted in किस्सा-कहानी, fiction
Tagged कहानी, किस्सा, चाकू, भरोसा, हिम्मत, हौसला, story
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छुअन के चार पड़ाव
पहला पड़ाव मेरा जन्मदिन. हम दिन भर घूमे थे. शाम को हॉस्टल के गेट पर खड़े होकर बातें कर रहे थे. मेरा मन नहीं हो रहा था कि तुम्हें छोड़कर अंदर जाऊँ. शाम का धुँधलका, गुलाबी ठण्ड. तभी हल्की हवा … Continue reading







