My Pets – Kali

मुझे होली में एक पामेरेनियन पपी उपहार में मिली. मैं उसकी कुछ फोटो अपलोड कर रही हूँ. मैंने उसका नाम कली रखा है. कली बहुत शैतान है. वो या तो खेलती है या फिर सोती रहती है. सोती भी है अजीब-अजीब मुद्राओं में. अभी दो महीने की भी पूरी नहीं हुई है, पर बड़ी अक्ल है उसमें. मेरे बेड पर सोने के लिये चादर खींचती है और मेरे जवाब न देने पर भौंकने लगती है. जब उसे अपनी मम्मी की याद आती है, तो बालकनी में जाकर मुँह ऊपर करके कूँ-कूँ करती है. मैं उसको अभी सुबह-शाम उसकी मम्मी के पास ले जाती हूँ.

(17 मई २०१० को शाम 7.30 बजे कली का देहांत हो गया… पर मेरी यादों में वो हमेशा रहेगी )

6 Responses to My Pets – Kali

  1. यादें यहां भी हैं तो कैसे जा सकती है कली। जबकि वो है इतनी भली। घूमती रही है घर की गली गली। महकती रही कली से गली गली।

  2. क्या छोटी सी मासूम को परेशान किया हुआ था :-)
    वैसे वो सीटी आप बजा रहीं थीं? गज़ब!!

    सच में इन बेज़ुबानों की मासूमियत का सानी नहीं
    यादें वाकई में बहुत तड़पाती हैं। आंखों में आंसू अब भी आ जाते हैं मोती, जॉनी, डेज़ी को याद कर :-(

  3. मेरे ‘पेट’ का नाम ‘पोचु’ था.वो मोहल्ले के बच्चो के साथ क्रिकेट खेलता था और बच्चियों के साथ रस्सी कूदता था.
    उसे ये सहन ही नही होता था कि कोई बच्चा मेरी गोद में बैठे.वो बीच में घुस कर उन्हें गिरा देता था.मेरी एक बांह पर उसका सिर होता और दूसरी पर मेरी बिटिया का.बिटिया पेट पर हाथ रख देती तो उसको भी रखना ही है,उसकी जिद होती थी . कैसे ये मूक जीव हमारे घर के मेम्बर बन जाते हैं.मैं समझ सकती हूँ.कली के जाने पर तुहारा दुःख………….

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