आराधना चतुर्वेदी ’मुक्ति’
कुछ यादें... कुछ बातें... कुछ अनुभव... कुछ विचार... वादों-विवादों से परे...!
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Tag Archives: अकेलापन
धूसर
दुनिया को जिस रंग के चश्मे से देखो, उस रंग की दिखती है. अभी धूसर रंग छाया हुआ है. जैसे अभी-अभी आँधी आयी हो और सब जगह धूल पसर गई हो या कहीं आग लगने पर धुँआ फैला हो या … Continue reading
छूटा हुआ कुछ
पिछले कुछ दिनों से मुझे मेरा घर बहुत याद आ रहा है. बाऊ के रहते डेढ़-दो महीने भी जिससे दूर नहीं रह पाती थी, आज उसे छूटे हुए पाँच साल से ज्यादा हो रहे हैं. कितना सोचा कि अब उस … Continue reading
मौत की खामोशी की धुन
अन्तर्जाल की दुनिया… एक आभासी संसार. किसी-किसी के लिये दुनिया से भागने की सबसे अच्छी जगह है ये…पर खुद से भागना हो तो? कोई जगह ही नहीं है, आदमी खुद से भाग ही नहीं सकता, कहीं भी नहीं, कभी भी … Continue reading
वो ऐसे ही थे (1.)
इस ३० जून को उनको गए पूरे चार साल हो गए… इन सालों में एक दिन भी ऐसा नहीं गुजरा, जब मैंने उन्हें याद ना किया हो… आखिर अम्मा के बाद वही तो मेरे माँ-बाप दोनों थे. परसों उनकी पुण्यतिथि … Continue reading
फागुन में बरसात
ये कोई अच्छी बात थोड़े ही है. अच्छी ख़ासी फगुनहट चल रही थी. मौसम में मस्ती की फ़ुहार थी. थोड़ा-थोड़ा आलस ज़रूर था, लेकिन कुल मिलाकर शिशिर की जड़ता समाप्त होने को थी. ब्लॉग-फाग छाया हुआ था. सब कुछ ठीक … Continue reading
फिर एक इंतज़ार
तुम क्यों आते हो?? तुम्हारे आने के साथ आता है डर तुम्हारे जाने का, मैं भी कितनी पागल हूँ… कि तुम्हारे आने से पहले तकती हूँ राह तुम्हारी, और करती हूँ घण्टों इंतज़ार… और तुम्हारे आने के बाद हो जाती … Continue reading
अवसाद-२ (साँझ की धूप)
धान के खेतों पर दूर तक फैली, थकी, निढाल पीली-पीली साँझ की धूप, आ जाती है खिड़की से मेरे कमरे में, और भर देती है उसे रक्ताभ पीले रंग से, … … इस उदास पीले रंग की अलौकिक आभा से … Continue reading
Posted in कविता सा कुछ/ poetry
Tagged अकेलापन, अवसाद, आकाश, कविता, खिड़की, शाम, साँझ, सूरज
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