Tag Archives: अवसाद

ब्लू

ज़िंदगी, एक कैनवस पर बनी इन्द्रधनुषी तस्वीर है, जिसमें बैंगनी और हरे के बीच नीला रंग आता है। वही नीला रंग जो आकाश, समुद्र और पहाड़ों को अपने रंग में रंग लेता है। मेरा मनपसंद उदासी का गहरा नीला रंग, … Continue reading

Posted in बातें | Tagged , , , , , | 6s टिप्पणियाँ

धूसर

दुनिया को जिस रंग के चश्मे से देखो, उस रंग की दिखती है. अभी धूसर रंग छाया हुआ है. जैसे अभी-अभी आँधी आयी हो और सब जगह धूल पसर गई हो या कहीं आग लगने पर धुँआ फैला हो या … Continue reading

Posted in बातें | Tagged , , , | 23s टिप्पणियाँ

छूटा हुआ कुछ

पिछले कुछ दिनों से मुझे मेरा घर बहुत याद आ रहा है. बाऊ के रहते डेढ़-दो महीने भी जिससे दूर नहीं रह पाती थी, आज उसे छूटे हुए पाँच साल से ज्यादा हो रहे हैं. कितना सोचा कि अब उस … Continue reading

Posted in यादें | Tagged , , , , , | 18s टिप्पणियाँ

अम्मा और मैं- एक अनोखा रिश्ता (3.)

कुछ महीने पहले एक कोशिश की थी, अठारह साल पहले इस दुनिया से रूठ गयी अपनी माँ से अपने रिश्ते को समझने की, उसे शब्दों में बाँधने की. सोचा था तीन कड़ियों में कुछ समेट पाऊँगी. वैसे तो माँ की … Continue reading

Posted in यादें | Tagged , , , , , | 24s टिप्पणियाँ

मौत की खामोशी की धुन

अन्तर्जाल की दुनिया… एक आभासी संसार. किसी-किसी के लिये दुनिया से भागने की सबसे अच्छी जगह है ये…पर खुद से भागना हो तो? कोई जगह ही नहीं है, आदमी खुद से भाग ही नहीं सकता, कहीं भी नहीं, कभी भी … Continue reading

Posted in बातें | Tagged , , | 32s टिप्पणियाँ

वो ऐसे ही थे (1.)

इस ३० जून को उनको गए पूरे चार साल हो गए… इन सालों में एक दिन भी ऐसा नहीं गुजरा, जब मैंने उन्हें याद ना किया हो… आखिर अम्मा के बाद वही तो मेरे माँ-बाप दोनों थे. परसों उनकी पुण्यतिथि … Continue reading

Posted in यादें | Tagged , , , , | 30s टिप्पणियाँ

अवसाद-२ (साँझ की धूप)

धान के खेतों पर दूर तक फैली, थकी, निढाल पीली-पीली साँझ की धूप, आ जाती है खिड़की से मेरे कमरे में, और भर देती है उसे रक्ताभ पीले रंग से, … … इस उदास पीले रंग की अलौकिक आभा से … Continue reading

Posted in कविता सा कुछ/ poetry | Tagged , , , , , , , | 2s टिप्पणियाँ