आराधना चतुर्वेदी ’मुक्ति’
कुछ यादें... कुछ बातें... कुछ अनुभव... कुछ विचार... वादों-विवादों से परे...!
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Tag Archives: आकाश
घर और महानगर
घर (१.) शाम ढलते ही पंछी लौटते हैं अपने नीड़ लोग अपने घरों को, बसों और ट्रेनों में बढ़ जाती है भीड़ पर वो क्या करें ? जिनके घर हर साल ही बसते-उजड़ते हैं, यमुना की बाढ़ के साथ. (२.) … Continue reading
अवसाद-२ (साँझ की धूप)
धान के खेतों पर दूर तक फैली, थकी, निढाल पीली-पीली साँझ की धूप, आ जाती है खिड़की से मेरे कमरे में, और भर देती है उसे रक्ताभ पीले रंग से, … … इस उदास पीले रंग की अलौकिक आभा से … Continue reading
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Tagged अकेलापन, अवसाद, आकाश, कविता, खिड़की, शाम, साँझ, सूरज
2s टिप्पणियाँ
अवसाद-1 (अकेलापन)
अखरने लगता है अकेलापन शाम को… जब चिड़ियाँ लौटती हैं अपने घोसलों की ओर, और सूरज छिप जाता है पेड़ों की आड़ में, मैं हो जाती हूँ और भी अकेली. … … मैं अकेली हूँ… सामने पेड़ की डाल पर … Continue reading
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Tagged अकेलापन, अवसाद, आकाश, कविता, खिड़की, पक्षी, शाम, सूरज
5s टिप्पणियाँ
पसीना
आसमान की ओर देखता हुआ घुरहू केवट खुश है “गाँववालों…!! तुम भले ही मत आने दो नहर का पानी मेरे खेतों तक, पर आकाश नहीं करता पक्षपात देखो, बादल आ गये हैं… वो बरसेंगे सभी खेतों पर एक समान, तब … Continue reading







