Tag Archives: गीत

मैं प्यासी

… जब घुमड़ घिरी घनघोर घटा रह-रहके दामिनी चमक उठी, उपवन में नाच उठे मयूर सौंधी मिट्टी की महक बिखरी, बूँदें बरसीं रिमझिम-रिमझिम सूखी धरती की प्यास बुझी, पर मैं बिरहन प्यासी ही रही… … … … ये प्रकृति का … Continue reading

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“…कचौड़ी गली सून कईलैं बलमू”

आजकल ब्लॉगजगत में फागुन आया हुआ है. कुछ लोगों ने तो अपने ब्लॉग पर चेतावनी भी लगा रखी है कि भई संभल के टिप्पणी देना, इस ब्लॉग पर फागुन आया है. पर, मेरा मन इन दिनों एक कजरी पर अटका … Continue reading

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चलो मीठा सा गीत कोई गुनगुनाएं

जाके बीते ज़माने में आज फिर से चलो बचपन की यादों को बीन लायें, भूलकर ज़िंदगी की परेशानियाँ, चलो मीठा सा गीत कोई गुनगुनाएं. … … … … चलो पलटें पुरानी किताबों को आज, बिछड़े यारों की फोटो को फिर … Continue reading

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ये हवा बसंती गाती है…

मेरे मन से उनके मन तक एक पतली डोर बँधी सी है, कुछ बात इधर से चलती है कुछ याद उधर से आती है… … … … उनके अन्तस्‌ की व्याकुलता मैं यहाँ बैठ गुन लेती हूँ, मेरी पुकार को … Continue reading

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