आराधना चतुर्वेदी ’मुक्ति’
कुछ यादें... कुछ बातें... कुछ अनुभव... कुछ विचार... वादों-विवादों से परे...!
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Tag Archives: घर
आदत
उस घर में सिर्फ एक कमरा था, जिसमें एक रोशनदान था, एक खिड़की और एक ही दरवाजा. खिड़की के उस ओर दूसरी बिल्डिंग की दीवार होने की वजह से उससे उतनी रोशनी नहीं आती थी, जितनी आनी चाहिए. रोशनदान से … Continue reading
छूटा हुआ कुछ
पिछले कुछ दिनों से मुझे मेरा घर बहुत याद आ रहा है. बाऊ के रहते डेढ़-दो महीने भी जिससे दूर नहीं रह पाती थी, आज उसे छूटे हुए पाँच साल से ज्यादा हो रहे हैं. कितना सोचा कि अब उस … Continue reading
खुश रहने की कुछ वजहें
मुझे आज भी याद है, जब उसका जन्म होने वाला था और दीदी हॉस्पिटल में थीं, तो मैं तीन-चार दिन तक रोज़ सपने में एक छोटी सी गुड़िया देखती थी, पंखुरी सी कोमल, पालने में लेटी अपने नन्हे-नन्हे हाथों से … Continue reading
घर और महानगर
घर (१.) शाम ढलते ही पंछी लौटते हैं अपने नीड़ लोग अपने घरों को, बसों और ट्रेनों में बढ़ जाती है भीड़ पर वो क्या करें ? जिनके घर हर साल ही बसते-उजड़ते हैं, यमुना की बाढ़ के साथ. (२.) … Continue reading
मिट्टी का घर, आम का पेड़, झूले, कजरी…सब बीती बातें
मेरे गाँव में बरसों पहले हमारा एक मिट्टी का घर था. आँगन, ओसार, दालान और छोटे-छोटे कमरों वाले उस बड़े से घर से धुँए, सौंधी मिट्टी, गुड़(राब) और दादी के रखे- उठे हुए सिरके की मिली-जुली गंध आती थी. घर … Continue reading
Posted in यादें
Tagged आम का पेड़, गाँव, घर, झूले, मिट्टी का घर, यादें, सोंधी खुशबू, natural beauty
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गाँव की सर्दियाँ
दिल्ली की सर्दी भी हाड़ कँपा देने वाली होती है. कोहरा, धुन्ध और ठन्डी हवाओं से बचने के कुछ ही उपाय होते हैं- रजाई, चाय और हीटर. पर इस बार फिर मुझे गाँव की सर्दियों की बहुत याद आ रही … Continue reading







