Tag Archives: चाँद

घर और महानगर

घर (१.) शाम ढलते ही पंछी लौटते हैं अपने नीड़ लोग अपने घरों को, बसों और ट्रेनों में बढ़ जाती है भीड़ पर वो क्या करें ? जिनके घर हर साल ही बसते-उजड़ते हैं, यमुना की बाढ़ के साथ. (२.) … Continue reading

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गाँव की मिट्टी

मैं नहीं कहती कि मेरे दामन को तारों से सजा दो चाँद को तोड़कर मेरा हार बना दो मेरे लिये कुछ कर सकते हो तो इतना करो मेरे गाँव की मिट्टी की सोंधी खुशबू ला दो

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