आराधना चतुर्वेदी ’मुक्ति’
कुछ यादें... कुछ बातें... कुछ अनुभव... कुछ विचार... वादों-विवादों से परे...!
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Tag Archives: प्यार
झूमना अंतरिक्ष में नक्षत्रों के बीच
तुमसे मिलना है फूलों की घाटी में होना, असंख्य पुष्पों की हज़ारों खुशबुओं और सैकड़ों रंगों के बीच डूब जाना, ढाँप लेना मुँह को शीतल परागकणों से, घास के मखमली कालीन पर लोट लगाना…. ताकना तुम्हारी आँखों में, गहरे नीले … Continue reading
दीवाने लोग
दीवाने लोग पड़ ही जाते हैं अक्सर किसी न किसी के प्यार में अफ़सोस ये कि जिससे प्यार है, उसे पता ही नहीं, जाने क्या मिलता है और जाने क्या खो जाता है, रात आती है, मगर नींद गुमशुदा है … Continue reading
लिखि लिखि पतियाँ
सुनो प्यार, तुमने कहा था जाते-जाते कि शर्ट धुलवाकर और प्रेस करवाकर रख देना। अगली बार आऊंगा तो पहनूँगा। लेकिन वो तबसे टंगी है अलगनी पर, वैसी ही गन्दी, पसीने की सफ़ेद लकीरों से सजी। मैंने नहीं धुलवाई। उससे तुम्हारी … Continue reading
कि तू प्यार में है
सुना था कि इश्क सिर्फ एक बार हुआ करता है या कि पहला प्यार भुलाए नहीं भूलता या फिर पहले प्यार सी गर्मी फिर कभी नहीं आ पाती…झूठ है सब,परले दर्जे का झूठ…”ये बातें झूठी बातें हैं, ये लोगों ने … Continue reading
प्यार करते हुए
प्यार करते हुए जब-जब लड़के ने डूब जाना चाहा लड़की उसे उबार लाई। जब-जब लड़के ने खो जाना चाहा प्यार में लड़की ने उसे नयी पहचान दी। लड़के ने कहा, “प्यार करते हुए अभी इसी वक्त मर जाना चाहता हूँ … Continue reading
इस मोड़ से जाते हैं …
बहुत-बहुत मुश्किल होता है अपने ही फैलाए हुए जाल से बाहर निकलना. पहले तो हम चीज़ों को सीरियसली लेते ही नहीं, हर काम पेंडिंग में डालते चलते हैं और जब यही पेंडिंग बातें, मसले, फैसले आपस में उलझ जाते हैं, … Continue reading







