Tag Archives: प्रेम

नारीवादी स्त्री प्रेम नहीं करती?

फेसबुक बड़ी मज़ेदार जगह है. यहाँ गंभीर विमर्श के लिए भले ही अपेक्षित स्थान न हो, लेकिन उसके लिए सामग्री अवश्य प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।  यह पोस्ट फेसबुक पर मेरे एक स्टेटस और उस पर आये एक कमेन्ट से … Continue reading

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झूमना अंतरिक्ष में नक्षत्रों के बीच

तुमसे मिलना है फूलों की घाटी में होना, असंख्य पुष्पों की हज़ारों खुशबुओं और सैकड़ों रंगों के बीच डूब जाना, ढाँप लेना मुँह को शीतल परागकणों से, घास के मखमली कालीन पर लोट लगाना…. ताकना तुम्हारी आँखों में, गहरे नीले … Continue reading

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लिखि लिखि पतियाँ

सुनो प्यार, तुमने कहा था जाते-जाते कि शर्ट धुलवाकर और प्रेस करवाकर रख देना। अगली बार आऊंगा तो पहनूँगा। लेकिन वो तबसे टंगी है अलगनी पर, वैसी ही गन्दी, पसीने की सफ़ेद लकीरों से सजी। मैंने नहीं धुलवाई। उससे तुम्हारी … Continue reading

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दिल एक रेगिस्तान है

मेरा दिल एक रेगिस्तान है। तुम्हारा प्यार बारिश की तरह बरस-बरसकर खो जाता है, लेकिन उसे भिगो नहीं पाता। फिर हवा चलती है और बूँदों के निशान भी मिट जाते हैं। कुछ नहीं बचता, न तुम्हारा प्यार और न उसका … Continue reading

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प्यार करते हुए

प्यार करते हुए जब-जब लड़के ने डूब जाना चाहा लड़की उसे उबार लाई। जब-जब लड़के ने खो जाना चाहा प्यार में लड़की ने उसे नयी पहचान दी। लड़के ने कहा, “प्यार करते हुए अभी इसी वक्त मर जाना चाहता हूँ … Continue reading

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दर्दे-ए-हिज्र बेहतर है फिर तो तेरे पास होने से

… मुझे तारीखें याद नहीं रहतीं. पिछली दफा तुम किस तारीख को आये, कब गए, अगली बार कब आओगे, कुछ भी नहीं. मैं कैलेण्डर के पन्ने नहीं पलटती, जिससे तुम्हारे जाने का दिन याद रहे… और जब तुम आते हो, … Continue reading

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ईर्ष्या, स्वार्थ, डर, मजबूरी, दुःख, प्यार…

मेरी प्रिय सहेली की शादी तय हो गयी है और आश्चर्य है कि मुझे खुशी नहीं हो रही है, दुःख भी नहीं हो रहा है, बड़ा ही अजीब लग रहा है, बहुत ज्यादा. अपने आपको ठगा सा महसूस कर रही … Continue reading

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