Tag Archives: मरण

चलत की बेरिया

हमारा देश दार्शनिकों का देश है, दर्शन का देश है. दर्शन यहाँ के जनमानस के अन्तर्मन में समाया हुआ है, जनजीवन में प्रतिबिम्बित होता है. कुछ लोग कर्मवादी हैं, तो कुछ लोग भाग्यवादी. पर समन्वय इतना कि कर्मवादी लोग भी … Continue reading

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मोक्ष

मैंने जन्म लिया इसी जगह बार-बार और मरती रही तिल-तिलकर कितनी ही बार जीवन और मरण के बीच पड़ी रही कोमा में कभी महीनों तो कभी सालों फिर मरी और फिर जन्म लिया एक ही जन्म में सैकड़ों जन्म बिता … Continue reading

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