Tag Archives: विरह-अग्नि

मैं प्यासी

… जब घुमड़ घिरी घनघोर घटा रह-रहके दामिनी चमक उठी, उपवन में नाच उठे मयूर सौंधी मिट्टी की महक बिखरी, बूँदें बरसीं रिमझिम-रिमझिम सूखी धरती की प्यास बुझी, पर मैं बिरहन प्यासी ही रही… … … … ये प्रकृति का … Continue reading

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मेरे जीवन में भी काश

मेरे जीवन में भी काश एक बार आता मधुमास कामदेव का बाण मुझे भी लग जाता मुझको भी हो जाती पिया मिलन की आस मेरे जीवन में… रिक्त हृदय का प्याला भर जाता मधु से मिट जाती मेरे भी हृदय … Continue reading

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