Tag Archives: संसार

चलत की बेरिया

हमारा देश दार्शनिकों का देश है, दर्शन का देश है. दर्शन यहाँ के जनमानस के अन्तर्मन में समाया हुआ है, जनजीवन में प्रतिबिम्बित होता है. कुछ लोग कर्मवादी हैं, तो कुछ लोग भाग्यवादी. पर समन्वय इतना कि कर्मवादी लोग भी … Continue reading

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तुम्हारा जाना

फूल सभी मुरझा गये सूरज बुझ गया चिड़िया गूँगी हो गयी, सन्नाटा फैल गया सब ओर… दिशायें सूनी हो गयीं, रंगो से भरा ये संसार कब हो गया फीका-सा मुझे धुँधली सी भी नहीं याद, कि देखी हैं कब बहारें … Continue reading

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