Tag Archives: सोंधी खुशबू

मैं प्यासी

… जब घुमड़ घिरी घनघोर घटा रह-रहके दामिनी चमक उठी, उपवन में नाच उठे मयूर सौंधी मिट्टी की महक बिखरी, बूँदें बरसीं रिमझिम-रिमझिम सूखी धरती की प्यास बुझी, पर मैं बिरहन प्यासी ही रही… … … … ये प्रकृति का … Continue reading

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मिट्टी का घर, आम का पेड़, झूले, कजरी…सब बीती बातें

मेरे गाँव में बरसों पहले हमारा एक मिट्टी का घर था. आँगन, ओसार, दालान और छोटे-छोटे कमरों वाले उस बड़े से घर से धुँए, सौंधी मिट्टी, गुड़(राब) और दादी के रखे- उठे हुए सिरके की मिली-जुली गंध आती थी. घर … Continue reading

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गाँव की मिट्टी

मैं नहीं कहती कि मेरे दामन को तारों से सजा दो चाँद को तोड़कर मेरा हार बना दो मेरे लिये कुछ कर सकते हो तो इतना करो मेरे गाँव की मिट्टी की सोंधी खुशबू ला दो

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