Tag Archives: unnao

बीते हुए दिन… फिर से नॉस्टेल्जिया

नॉस्टेल्जिया बड़ी अजीब सी चीज़ होती है। पता नहीं ये एक मानसिक स्थिति है या मानसिक विकार या बीमारी, लेकिन है अजीब। मुझे लगता है कि कुछ लोग प्रवृत्ति से ही अतीतजीवी होते हैं और ये उनकी बीमारी नहीं होती। … Continue reading

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खुरपेंचें, खुराफातें…पीढ़ी दर पीढ़ी

जी, खुरपेंची होना हमारे बैसवारा की सबसे बड़ी विशेषता है. बड़े-बड़े लम्बरदार भी इससे बाज नहीं आते. बचपन से ऐसी खुराफातें देखकर बड़ी होने के बाद भी मैं इतनी सीधी (?) हूँ, इससे सिद्ध होता है कि वातावरण हमेशा ही … Continue reading

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दिए के जलने से पीछे का अँधेरा और गहरा हो जाता है…

मैं शायद कोई किताब पढ़ रही थी या टी.वी. देख रही थी, नहीं मैं एल्बम देख रही थी, बचपन की फोटो वाली. अधखुली खिड़की से धुंधली सी धूप अंदर आ रही थी. अचानक डोरबेल बजती है. मैं दरवाजा खोलती हूँ, … Continue reading

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अम्मा और मैं- एक अनोखा रिश्ता (3.)

कुछ महीने पहले एक कोशिश की थी, अठारह साल पहले इस दुनिया से रूठ गयी अपनी माँ से अपने रिश्ते को समझने की, उसे शब्दों में बाँधने की. सोचा था तीन कड़ियों में कुछ समेट पाऊँगी. वैसे तो माँ की … Continue reading

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आस-पड़ोस की बातें

मेरा मोहल्ला संभवतः दिल्ली का सबसे इंटरेस्टिंग मोहल्ला होगा. इसके ऊपर मैंने कुछ दिन पहले एक लेख भी लिखा था मोहल्ला मोहब्बत वाला . यहाँ पिछले पाँच सालों से रह रही हूँ. इसलिए काफी लोगों से परिचय भी हो गया है. … Continue reading

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