आराधना का ब्लॉग

'अहमस्मि'- अपनी खोज में

पसीना

आसमान की ओर देखता हुआ
घुरहू केवट खुश है
“गाँववालों…!!
तुम भले ही
मत आने दो
नहर का पानी
मेरे खेतों तक,
पर आकाश
नहीं करता पक्षपात
देखो,
बादल आ गये हैं…
वो बरसेंगे सभी खेतों पर
एक समान,
तब मैं करूँगा
धान की रोपाई,
और जितना अन्न
तुम पैसे से उपजाओगे,
उससे कहीं ज़्यादा
मैं उपजाउँगा
अपने पसीने से…”

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One thought on “पसीना

  1. वह कितनी सुन्दर सी कविता है -कुदरत सभी के साथ एक सरीखा व्यवहार करती है ! क्यों न हम कुदरत से कुछ सीखें !

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