आराधना का ब्लॉग

'अहमस्मि'- अपनी खोज में

गुनगुनी धूप

गुनगुनी धूप
कल उतरी मेरी बालकनी में,
जैसे अम्मा ने
हौले से
दुलार दिया हो मुझे,
इससे पहले तो
धूप में
न था इतना अपनापन …
क्या भेजा है कोई संदेश
उसने स्वर्ग से?

Single Post Navigation

8 thoughts on “गुनगुनी धूप

  1. वो तो हर रुप में आसपास है…

  2. हाँ यह उनका ही प्रेरक सन्देश है ….जाड़े की जड़ता को त्यागिये और अपने अभीष्ट तक पहुँचिये .

    • अरविन्द जी, सही कहा आपने. अम्मा ऐसे ही प्रकृति के विभिन्न संकेतों द्वारा मुझे समय-समय पर प्रेरणा देती रहती है.

  3. गुनगुनाती धूप अम्मा के स्पर्श जैसी होती है
    बहुत सुन्दर अनुभूति

  4. माँ का अहसास हमारी रक्त वाहिनियों में निरन्तर प्रवाहित होता है….हर साँस में वह हमारे साथ है..ज़रूरत है महसूस करने की….

  5. .
    सहज – सरल – सरस
    मातृ – नेह – बरस
    कथन – काव्य – मय
    अपन – मगन – हरष
    .
    बरबस मन मोह गयी
    सीधी सी कविता , या
    सीधी सी कविता पर
    मन मोहाय जाता है ..
    .
    क्यों एक कविता अन्य कविताओं की पीठिका
    बनने लगती है ? , भूल जाता हूँ कि और भी काम है ..
    धूप और माँ को इतना सान्द्र हो कर मिला दिया आपने
    कि ‘ सब एक तत्व सा महसूस होने लगा ‘ ..
    .
    बहुत अच्छा लगा ! आभार !

    • अमरेन्द्र, आप बहुत अच्छे आलोचक हैं. आप और हिमांशु को मैं भावी आलोचकों के रूप में देख रही हूँ. आभार

  6. आलोचक तो पता नहीं, पर भावक तो हूँ ही ऐसी कविताई का !

    गुनगुने प्यार का एहसास इतने उदात्त भाव से किया है आपने कि…
    सच्चा, गुनगुना, उजला माँ का प्यार !

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: