आराधना का ब्लॉग

'अहमस्मि'- अपनी खोज में

ईर्ष्या, स्वार्थ, डर, मजबूरी, दुःख, प्यार…

मेरी प्रिय सहेली की शादी तय हो गयी है और आश्चर्य है कि मुझे खुशी नहीं हो रही है, दुःख भी नहीं हो रहा है, बड़ा ही अजीब लग रहा है, बहुत ज्यादा. अपने आपको ठगा सा महसूस कर रही हूँ. ऐसा क्यों हो रहा है, ये भी समझ में नहीं आ रहा है. पता नहीं ऐसा इस ईर्ष्या के कारण हो रहा है कि उसे कोई मुझसे भी ज्यादा चाहने वाला मिल जाएगा.  कोई ऐसा, जिसका महत्त्व मुझसे कहीं ज्यादा होगा उसके जीवन में. या इस बात का डर है कि मेरी ये सहेली भी अपनी घर-गृहस्थी में खो जायगी और फिर मुझे याद नहीं करेगी.

हो सकता है कि किसी-किसी को ये मेरा निपट स्वार्थ लगे, पर ये सच है. मुझे डर लगता है अपनी प्रिय सहेली को खो देने का. क्योंकि इससे पहले कई सहेलियाँ शादी के बाद अपनी घर-गृहस्थी में खो गयीं और भूल गयीं कि कभी हम एक-दूसरे से एक दिन भी बिना बात किये नहीं रह पाते थे. हॉस्टल में कितना हल्ला-गुल्ला मचाते थे. जानती हूँ कि शादी एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, पति-पत्नी दोनों के लिए, पर इसकी कीमत लड़कियों को कहीं ज्यादा चुकानी पड़ती है. लोग कहते रहें कि ज़माना बदल गया है, पर अब भी अपना घर-परिवार, अपना शहर  लड़कियों को ही छोड़ना पड़ता है. माँ-पिता और भाई-बहन से बिछड़ना पड़ता है, दोस्तों से दूरियां बन जाती हैं. उनके लिए सबकुछ अब नया होता है. एकदम नयी ज़िंदगी की शुरुआत. बीता सब कुछ पीछे छोड़कर नए माहौल में सामंजस्य. तो लड़कियों के पास अपने दोस्तों के लिए समय ही कहाँ बचता है? लगता ही नहीं ये वही लड़कियाँ हैं…शादी के पहले जिन लड़कियों के बातों का विषय सारा संसार हुआ करता था, अब वही सिर्फ अपने पति, परिवार, ससुराल और बच्चों तक सिमट के रह जाती हैं. जो सहेलियाँ अपनी लगती थीं, उनसे अपने आपको जोड़ पाना कठिन लगता है. असहज सा महसूस होता है. ये मेरा स्वार्थ हो सकता है, तो मैं स्वार्थी हूँ या हो सकता है मेरी मजबूरी हो…

मजबूरी …मेरी मजबूरी, एक अविवाहित लड़की की. एक अकेली लड़की की स्थिति हमारे समाज में इतनी अजीब होती है कि उसे अपने संबंधों को बनाए रखने या नए सम्बन्ध बनाने में सौ बार सोचना पड़ता है.  सिर्फ शादीशुदा सहेलियों से ही नहीं, पुरुष मित्रों से भी बात करने में हिचक होती है. पिछले दिनों मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त की शादी होने के बाद मैंने उससे बात करना कम कर दिया. इसलिए नहीं कि उसके पास या मेरे पास समय नहीं है, बल्कि इसलिए कि मुझे इस बात से डर लगता है कि कहीं मेरा ज्यादा बात करना उसकी पत्नी को बुरा ना लगे. मैं जानती हूँ कि मेरे और मेरे दोस्त में कैसे सम्बन्ध हैं, पर हो सकता है कि एक सामान्य से माहौल में पली-बढ़ी उसकी पत्नी इस बात को ना समझ पाए. ऐसा हर जगह नहीं होता, मेरे साथ हो सकता है क्योंकि मैं अकेली हूँ. हो सकता है कि ये सिर्फ मेरा डर हो, पर सावधान तो रहना ही पड़ता है.

मैं अपनी जिस सहेली के बारे में यहाँ बात कर रही हूँ, वो पूरे आठ साल मेरी रूममेट रही है और सहेली तो पिछले चौदह सालों से है और आगे की सारी ज़िंदगी के लिए. मैं जानती हूँ कि अपनी शादी के बाद भी वो मुझे वैसे ही याद करेगी, वैसे ही चाहेगी, पर फिर भी एक अनजाना सा डर मन में बैठ गया है. इस समय भी वो मेरे साथ नहीं है, पर फिर भी मेरे सबसे करीब है. उसकी कोई बात मुझसे पहले किसी को पता चल जाती है, तो मुझे बुरा लगता है. इतना ज्यादा भी नहीं, पर लगता है. उससे कह ज़रूर देती हूँ कि तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया? तुमने उसे फोन किया, मुझे नहीं किया. बचकानी सी बात है, पर है. उसके हर मामले में पहला होने का मेरा हक खो जाएगा. कोई उसके लिए सबसे करीब, सबसे पहला हो जाएगा.

अगले महीने उसकी शादी है. सबसे ज्यादा दुःख इस बात का होगा कि वो हम सबसे दूर, दूसरे देश चली जायेगी. अभी हम महीने-दो महीने पर मिल लेते हैं, फिर शायद सालों मुलाक़ात ना हो. पर, मेरी उसके लिए हमेशा यही शुभकामना है कि उसका वो “सबसे पहला” उसे इतना चाहे, इतना प्यार करे कि वो मुझे क्या दुनिया को भूल जाए.

Single Post Navigation

25 thoughts on “ईर्ष्या, स्वार्थ, डर, मजबूरी, दुःख, प्यार…

  1. मेरी पत्नी की एक सहेली थीं …अब भी वे उसे याद करती हैं एक ठंडी आह के साथ ..मगर अब वह कहाँ है उन्हें पता नहीं है !
    समय बड़ा बलवान है कितनो को पास ला देता है और कितनों को अनजाने बियाबान में लेकर चला जाता है …
    दिक् काल की इन होनी अनहोनियों की फ़िक्र छोड़ जो जैसा है वैसा है को स्वीकार करते रहने की आत्म्श्चर्या अपनाईये .

  2. Chill… आराधना…ऐसा कुछ नहीं होगा…वो तुम्हे बिलकुल नहीं भूलेगी…बस ये होगा कि अब पहले की तरह चौबीसों घंटे अवेलेबल नहीं रहेगी…हालांकि आजकल इतनी सुविधाएं, हैं कि एक sms कर दोगी…और वो कॉल बैक जरूर करेगी…भले ही दूसरे दिन कर पाए.

    शादी के बाद, जिम्मेवारियां बढ़ने से समय की कमी हो जाती है पर अहसास कभी नहीं मरते. जो बातें तुमलोग दिन में दस बार फोन करके करती थीं…अब वो दो दिन, में एक बार में ही होगी…सबके ‘सार’ रूप में….पर होगी,जरूर. अगर दोस्ती पुरानी हो,पक्की हो तो कभी नहीं मरती.

    और मैं यह अपने अनुभव से कह रही हूँ. मेरी एक बेस्ट फ्रेंड की शादी , इंटर के बाद ही हो गयी . मैने ही उस से दूरी बढ़ा ली…कि अब वो नए जीवन में व्यस्त होगी. पर उसके पत्र (तब यही ज़माना था ) नियमित रहें और वो अपने पति के साथ, मुझसे मिलने हॉस्टल में…दूसरे शहरों में….मेरी शादी में…शादी के बाद भी गर्मी छुट्टियों में पटना जाती तो वो लम्बा सफ़र तय कर मुझसे मिलने जरूर आती.
    यह insecurity स्वाभाविक है और सिर्फ लड़कियों में ही नहीं…लड़कों में भी होती है, उन्हें भी डर लगता है, पत्नी के आने के बाद, दोस्त उन्हें भूल जायेगा. पर ऐसा नहीं होता.
    इसलिए उसके साथ बचे समय का खूब उपयोग करो..शॉपिंग करवाओ और उसकी शादी में जम कर नाचो…:)

  3. प्रवीण पाण्डेय on said:

    दुख तो होता है पर प्रसन्न रहें। यह बात भी सच है कि नयी गृहस्थी के बाद समय नहीं मिल पाता है। यदि अन्यथा न लें तो एक बात कह देता हूँ कि आप भी विवाह कर लें अब, एक मित्र गया, दूसरा मिल जायेगा।

  4. यह सच है कि शादी के बाद लड़कियों की ज़िंदगी बदल जाती है …सहेली याद तो करेगी पर यह भी सच है कि हर समय बात नहीं हो पायेगी …पर वक्त सब सहना सिखा देता है ..आपकी दुआएं कबूल हों …और हमारी कामना है कि आपके लिए भी कोई शीघ्र ही “सबसे पहला” आ जाये ..

  5. *आत्म्श्चर्या=तपश्चर्या

  6. ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है…

  7. shuruaati paira me aapki imandari ko salam.

    baki yahi kahunga ki ye zindagi hai, milte hain bichhad jane ko……

    shubhkamnayein

  8. हमारी तरफ से उन्हें मुबारकबाद दें ! ये भी एक अनुभव है जीवन का ! आपके लिए शुभकामनाएं !

  9. प्रिय आराधना ,
    आपने निष्पक्षता और सरल हृदय से बात लिखी . जिंदगी में हर कदम पर कुछ विकल्प आते ही हैं जहाँ दर्द या दुःख को सहन करना हमारी मजबूरी होती हैं क्योंकि हम भगवान् तो हैं ही नहीं . बस सीधे शब्दों में कहे तो ” ये जिंदगी हैं जैसी सामने आये जीनी पड़ती हैं ” और भी उससे बड़ी बात कि ये दुःख बस ईश्वर का दिया हैं उसे थोडा धैर्य के साथ सहन कर लेने के अलावा हम कुछ नहीं कर सकते . अपने बैस्ट फ्रेंड का अलग हो जाना वाकई दुखदायी होता हैं . पर इसे कुदरत के नियम मान लीजिये और विश्वास कीजिये ईश्वर सबके लिए कोई ना कोई दोस्त या प्रियजन हमेशा बनाकर रखता हैं . आपके लिए ईश्वर ने आपकी अपेक्षा से कही ज्यादा अच्छा सोचा होगा और वो आपके सामने उसे झटके से लाकर खड़ा कर देगा . आपका नाम ही इतना पवित्र हैं कि वो आपके लिए बस पवित्रतम साथी ढूंढ रहा हैं इसीलिए इतना समय लग गया एक आदर्ष व्यक्ति को ढूँढने में . ईश्वर आपको खूब खूब खुशिओ से भर देगा , मेरा विश्वास करो अनुराधा .
    वैसे सॉरी , मैंने कुछ ज्यादा ही आगे कि बात लिख दी भावुकता में बहकर .

  10. हाथ छूट जाने से साथ नहीं छूटता..

  11. आराधना जी, ऐसा कुछ नहीं होगा…आप फ़िक्र मत कीजिये…
    मेरे सामने ही दो उदाहरण हैं…मेरी दो दोस्त की शादी हो गयी पिछले साल…पहले तो वो मेरे से बहुत बात करती थी, हमेशा लड़ना..झगडना…लेकिन शादी के बाद मैंने अपनी तरफ से बात लिमिटेड ही रखा, सोचा की कहीं उसके पति को बुरा न लगे…लेकिन जब ये पता चला की ऐसा कुछ नहीं …तो फिर से हमारी लड़ाई शुरू हो गयी…😛

    इसलिए आप फ़िक्र न करें..🙂

  12. कोई गल नहीं…
    आप पर निर्भर करता है…कि आप उसे अपने आपको भूल जाने देती हैं या नहीं…

    और याद दिलाना पड़े….इसमें भी मज़ा क्या है….

  13. जीवन की सार्थ्क्ता यही है , जीवन परीवर्तन का ही तो नाम है जब तक हुर्दय मैे जगह खाली नही होगी वन्हा कोइ और कैसे आकर बसेगा ………अब शायद नए वीचारों की जमीन तैयार होगी और ये तय मानीये की जल्दी ही एक नई अनुराधा हमारे सामने होगी…………….बस बदलाव का आनंद लीजीऎ

  14. दो बातें ख़ास लगीं –
    पहली तो – “लगता ही नहीं ये वही लड़कियाँ हैं…शादी के पहले जिन लड़कियों के बातों का विषय सारा संसार हुआ करता था, अब वही सिर्फ अपने पति, परिवार, ससुराल और बच्चों तक सिमट के रह जाती हैं. ”
    और दूसरी – “पर, मेरी उसके लिए हमेशा यही शुभकामना है कि उसका वो “सबसे पहला” उसे इतना चाहे, इतना प्यार करे कि वो मुझे क्या दुनिया को भूल जाए.”
    तो इन दोनों के बीच ……… चलती रहे… ज़िन्दगी।

  15. इतना कुछ सोच पा रही हैं आप तो ठीक ही होना है आगे…
    प्रविष्टि के अंत में आपकी अभिप्सित शुभाशंसा सही हो..यही मना रहे हैं हम सब !

    सहज अभिव्यक्ति ! आभार !

  16. चाहे कितने लोजिक दिए जाएँ आपकी बात को नकारा नही जा सकता . पर हर किसी लागू नही होता ये भी सही है
    दिनकर ने जो लिखा
    पुरुष जो श्रृंखला को तोड़ करके
    चले आगे नही जो जोड़ कर के
    वो महिलाओं पे भी लागू होता है
    अमृता जी को ले लीजिए या फिर किरण वेदी !

  17. प्रभावी अभिव्‍यक्ति, सधा लेखन. मनोहर श्‍याम जोशी याद आते हैं- ‘कितना त्रासद है ये हास्‍य और कितना हास्‍यास्‍पद है ये त्रास.

  18. कुछ लोंग हमारी जिंदगी में ऐसे होते हैं जिनकी जगह कोई नहीं ले सकता, वो हिस्सा खाली ही रह जाता है …और वो दूर होकर भी दूर नहीं होते …इसलिए चिंता नहीं करें , आपकी वो सहेली आपको कभी नहीं भूलेगी …
    आपके और आपकी सहेली के लिए ढेरों शुभकामनाएं !

  19. कई दिन से तुम्हारी याद नहीं आई,
    और ऐसा भी नहीं कि तुम्हे भूल गये…

    कवि रजत राहुल की कविता “लिखोगी न” की तरह हमेशा एक दूसरे के ज़हन में सितार सी बजाती रहोगी.

    जब की
    न फूल खिलें हैं
    और न ही हो रही है बारिश
    तुम बेहद याद आ रही हो
    लौटती चिठि में लिखना
    अच्छी तो हो…

    इधर पानी नही गिरा
    हरी नहीं हैं बातें
    सूखे हैं दिन, नाम रातें

    लौटती चिठि में
    लिखोगी न
    की उदास तो बिल्कुल नहीं हो
    की अच्छी हो

    जब की
    फूल खिले हैं
    और न ही हो रही है बारिश
    तुम बेहद याद आ रही हो

    You’ll survive it. Rinks and I still read this poem together after 23 years and relive our moments of teenage. Today I share this poem with you and other readers. The poet needs to be recognized, I read this poem in “Dharma Yug” magzine in 1987. If anyone has read any other of his works please let me know.
    Peace,
    Desi Girl

    Desi Girl

  20. Hope you read this at GGTS
    http://girlsguidetosurvival.wordpress.com/2010/08/02/633/

    So if things do change don’t take it to heart…

    Peace,
    DG

  21. दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
    मिल जाये तो मिटटी है खो जाए तो सोना है

    …. शुभकामनाएँ

  22. priya aradhna,
    khaas aapki saheli ke liye kuch panktiyaan…

    woh bebaat ka hansna,
    bebaat ka rona,
    naa milne ke shikve,
    aur aape ka khona…

    raah nayi par chal padi ho jo tum toh,
    aati bhi rehna,milti bhi rehna,
    chura lenge ham fir pal kuch dobaara,
    ji lenge fir se,
    woh bebaat ka hansna,bebaat ka rona….

    priorities change,emotions won’t!!
    take care,
    sharmila

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: