आराधना का ब्लॉग

'अहमस्मि'- अपनी खोज में

कोई हमको भी तो देखे, कोई हमसे भी तो पूछे

कुछ दिनों से लिख नहीं पा रही हूँ हालांकि शेयर करने के लिए बहुत कुछ है. कई सपनें, कुछ सवाल, कुछ समस्याएँ, कुछ समाधान. जाने कैसा दिमाग है कि किसी विशेष आयोजन के समय या विशेष दिवस को नज़र उन पर जाती है, जो फ्रेम से  बाहर हैं. आज बालदिवस है तो सोचा कि कुछ ऐसा देखा-दिखाया जाए…

 

बाल दिवस पर उन्हें हमारी शुभकामनाएँ !

(नोट : सारे चित्र मेरी सहेली चैंडी के कैमरे से… दहशत वाला छाया चित्र उस दलित परिवार के बच्चे का है, जिसके घर को सवर्णों द्वारा जला दिया गया था और उसके बाद वह बच्चा थोड़ी सी भी हलचल से डर जाता है.)

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14 thoughts on “कोई हमको भी तो देखे, कोई हमसे भी तो पूछे

  1. बिलकुल सही जगह इशारा किया | न जाने पूरे सिस्टम की नज़र किस ओर है !

  2. चित्रमय इस पोस्ट ने मन उदास सा कर दिया …बहुत कुछ कह गयी यह पोस्ट!
    मगर हम कुछ पढ़ना भी चाहते थे आपकी कलम से, आपके शब्दों में चित्रों से कम अभिव्यक्ति नहीं होती ..

  3. प्रवीण पाण्डेय on said:

    मैं उत्कट आशावादी हूँ, मुझे पूरा विश्वास है कि हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कराहट आयेगी।

  4. जीवन कीतना सटीक और नीर्मम है ईन छाया चीत्र में साफ़ झलकता है

  5. बच्चों के उदास चेहरों ने दुखी किया…
    मगर मैं सोचती हूँ कि प्रताड़ितों का दर्द एक सा ही होता है , वे चाहे स्वर्ण हो या दलित !

  6. चित्रों ने बालदिवस की झलक दिखला दी ….. सोचने पर मजबूर करती पोस्ट .

  7. सार्थक ब्लागिंग !

  8. शुभ-कामनाएँ हमारी भी। आपका आभार, हमें शुभकामना देने का मौका देने के लिये…इन तस्वीरों के सहारे।

  9. आराधना जी, इस बार तो सलीके से रस्म अदायगी का भी अभाव दिखा…
    बस हर तरफ़ घोटालों का शोर रहा…ऐसे में ….बस क्या कहा जाए.

  10. हर एक तस्वीर ऐसी कि आँखें वहाँ से हटने को इनकार कर रही हैं….सारे बच्चों के चहरे से मासूमियत झलक रही है…और ऐसे भाव जैसे अबूझ से देख रहें हों इस दुनिया को….’कैसी है ये दुनिया’

    बोलती सी तस्वीरें….हज़ार शब्दों के बराबर

  11. तस्वीरें बदलेंगी और मंजर भी .वह सुबह कभी तो आएगी.

  12. मैं हमेशा सोचता हूँ कि हर व्यक्ति यह क्योँ भूल जाता है कि वह कभी बच्चा था । क्या यह बच्चे बड़े होकर अपने इन चित्रोँ को भूल पायेंगे ?

  13. बहुत ही सुन्दर मन को छु लेने वाली पंक्तियाँ और चित्र
    राजीव
    http://rrajivhind.wordpress.com

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