आराधना का ब्लॉग

'अहमस्मि'- अपनी खोज में

दिल एक रेगिस्तान है

3678982986_03be85aee0

मेरा दिल एक रेगिस्तान है। तुम्हारा प्यार बारिश की तरह बरस-बरसकर खो जाता है, लेकिन उसे भिगो नहीं पाता। फिर हवा चलती है और बूँदों के निशान भी मिट जाते हैं। कुछ नहीं बचता, न तुम्हारा प्यार और न उसका असर। एक काम करो, तुम हवा ही बन जाओ। कम से कम हर वक्त मेरे पास तो रहोगे, बारिश की तरह कभी-कभी नहीं।

***

मेरा सबकांशस, कांशस माइंड से ज्यादा शक्तिशाली है। ऐसा मेरे साथ ही है या सभी के साथ, ये तो मनोवैज्ञानिक ही जानें। मैं खुश रहना चाहती हूँ, नहीं रह पाती क्योंकि सबकांशस माइंड दुखी होता है। मेरी इच्छा शक्ति इसी के पास है। मैं लाख चाहूँ कि न मिलूं किसी से, लेकिन अगर सबकांशस माइंड में रहने वाली इच्छा शक्ति अपनी पूरी ताकत लगा देती है, तो वो मिल ही जाता है। ये मुझे अपने इशारों पर नचाता रहता है। मैं किसी दिन पागल हो जाऊँगी।

***

ठीक उसी समय जब वो मेरे सामने होता है। तो चेहरा चमकता है। नहीं, मैं कभी मेक-अप नहीं करती। काजल लगा लेती हूँ कभी-कभी। ये ‘कुछ और’ ही है। एक दिन उसने कहा, “ये चेहरा इतना चमकता क्यों है?” मैंने कहा “रिफ्लेक्शन है” मैं चाँद हूँ, जो तुम्हारे प्यार की रोशनी से चमकता है, मेरे सूरज !

***

हाँ, कभी-कभी यूँ ही मुस्कुरा देना आदत है मेरी। उसने मेरी तस्वीर लेनी चाही और मैंने कहा, “एक दिन मुझे चूमने के बाद मेरी तस्वीर लेना। उस समय मैं दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत होती हूँ।”

***

किसी एक पल, जी चाहता है कि दुनिया की सारी घड़ियों की टिक-टिक रुक जाती, धरती गोल-गोल घूमना बंद कर देती और समय ठहर जाता। बस उसी एक पल, जब वो मेरे सामने आता है, जिसे चाहकर भी भूल नहीं पाती।

***

मुझसे किसी भी चीज़ का अंत ठीक से नहीं होता। न कविता का, न कहानी का, न लेख का और न किसी रिश्ते का। सोचती हूँ कि अंत के बारे में सोचना ही छोड़ दूँ।

***

मैं उससे प्यार करती हूँ। ज़िंदगी भर साथ निभाने का वादा है मेरा। किसी और के बारे में सोचना तक मेरे लिए पाप है। पर कभी-कभी पाप कर लेने का मन होता है। क्या तुम्हारा मन नहीं होता?

Advertisements

Single Post Navigation

17 thoughts on “दिल एक रेगिस्तान है

  1. तपती रेतकणों और अथाह प्यास से भरा, लम्बा सा रेगिस्तान..

  2. एक दिन उसने कहा, “ये चेहरा इतना चमकता क्यों है?” मैंने कहा “रिफ्लेक्शन है” मैं चाँद हूँ, जो तुम्हारे प्यार की रोशनी से चमकता है, मेरे सूरज !

    क्या बात है जी वाह! ये फ़ेसबुकिया ब्लॉगिंग के नमूने हैं। जय हो!

  3. मुझसे किसी चीज का अंत ठीक से नहीं होता | 🙂

  4. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 13/02/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन
    करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है
    . धन्यवाद!

  5. न आदि है ….न अंत है …..!!
    सुंदर अभिव्यक्ति ….

  6. अलग अलग मूड में लिखीं पंक्तियाँ ….. कभी कभी पाप करने का मन न होते हुये भी हो जाते हैं 🙂 अंतर मन की अभिव्यक्ति …

  7. पाप करते रहना चाहिए, तभी तो पाप का घड़ा भरेगा और फूटेगा भी.

  8. मन के कई मौसम होते हैं ……. ख्याल मौसम से

  9. @सोचती हूँ कि अंत के बारे में सोचना ही छोड़ दूँ।

    कभी किसी चीज़ का अंत होता है क्या ?
    बस रूप बदल जाते हैं ,कभी कुछ सिरे से ख़त्म नहीं होता .
    बहुत सुन्दर लिखा है

  10. पूरा का पूरा मन खंखाल कर रख दिया, सारे रंग एक साथ.खूबसूरत .

  11. ये कवितायें बहुत सुंदर हैं। इनमें ताज़गी है और सघन अनुभूतियों का बेहतरीन चित्रण भी…

  12. ख़ूब .. कुछ बेहद खूबसूरत एहसास !

  13. yeh paap he kya yeh punya he kya, reeton par dharm ki mohren hen!
    – Sahir Ludhiyanvi
    😛

  14. Mann to mera b bahut karta hai koi ek paap kar lu par konshis alow nahi karti wa wa wa……. Aradhna ji

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: