आराधना का ब्लॉग

'अहमस्मि'- अपनी खोज में

कि तू प्यार में है

सुना था कि इश्क सिर्फ एक बार हुआ करता है या कि पहला प्यार भुलाए नहीं भूलता या फिर पहले प्यार सी गर्मी फिर कभी नहीं आ पाती…झूठ है सब,परले दर्जे का झूठ…”ये बातें झूठी बातें हैं, ये लोगों ने फैलाई हैं।” प्यार एक नहीं, हज़ार बार हो सकता है। पहले प्यार को छोड़कर या पहले प्यार के रहते, दूसरा, तीसरा, चौथा प्यार हो सकता है। अलग-अलग समय में अलग-अलग से या एक ही आदमी से कई-कई बार हो सकता है। जुनूनी प्यार, रूहानी प्यार, रूमानी प्यार। प्यार रंगों से हो सकता है, ब्रश से, कैनवस से, कलम से और कागज़ से हो सकता है। अपनी नोटबुक से हो सकता है। प्यार चित्रों से हो सकता है, किताबों से हो सकता है।  प्यार लिखने से हो सकता है। यूँ ही नहीं हम चार दिनों से जाग रहे हैं। जीना मुहाल हुआ है। रात के ढाई बजे हैं, रेडियो पर गाना बज रहा है- ‘तूने तो पल भर में चोरी किया रे जिया,’ बाहर बारिश हो रही है, गैस पर चाय चढ़ी है, उँगलियाँ की-बोर्ड पर और हमारी आँखों में नींद नहीं…

(ठीक है तुम्हारे पास सुकून होगा। सोये होगे तुम आराम से नर्म बिस्तर पर, लेकिन मेरे जैसी आज़ादी है क्या तुम्हारे पास?)

सच कहता है कोई कि ‘तुम एकदम पागल हो, तुम्हें कोई भी बेवकूफ बना सकता है। बड़ी सयानी बनी फिरती हो।’ ये तो नहीं पता कि मैं पागल हूँ या नहीं, लेकिन मेरे दिल में ख़याल बड़े अजीब-अजीब से आते हैं, बड़ी अटपटी सी इच्छाएँ होती हैं। कई बार सोचा कि तीज का चाँद लाकर अपने कमरे में सजा लूँ। कई बार मन होता है- झरने के साथ पहाड़ी के ऊपर से नीचे गिरने का, बादलों के साथ बरसकर धरती को भिगो देने का, नदी के साथ बह जाने का, जंगल में अकेले भटकने का, पराग्लाइडर से घाटियों के ऊपर-ऊपर उड़ने का। एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ जाने की इच्छा होती है। रेगिस्तान के समंदर में डूब जाने को जी करता है। अतीत में जाकर अपने मनपसंद गायक को चूम लेने का मन होता है…भक् पागल लड़की!

(दीवानी होती हैं ऐसी लड़कियाँ…इनसे बचकर रहना चाहिए…ये वायरस की तरह खतरनाक हैं समाज के लिए…)

एक फूल है। सुन्दर सा, प्यारा सा, लेकिन वर्जित। उसे सूँघना मना है। देखना मना है। उसके आस-पास होने तक पर निषेधाज्ञा लागू है। मन में हुलस तो बड़ी थी उसे छूने की, अपना बना लेने की, लेकिन डर भी था। बहुत सोचा कि उसे न देखा जाय। उस बगीचे से ही न गुजरें, जिसमें वो फूल खिला हो। लाख रोका अपने दिल को। आँखें बंद कर लीं। दोनों हाथों की मुट्ठियाँ कसकर बाँधकर भींच लीं। सोचा था ऐसे ही गुज़र जायेंगे वो पल। लेकिन नहीं, ठीक उस बगीचे के बगल में  पहुँचने पर किसी ने आवाज़ दी और आँख खुल गयी। सामने वो फूल था। उसके रंग और खुशबू मन में समा गए…जी पर एक सम्मोहन… और मैं उसमें डूबती जा रही हूँ। रात-रात भर उसका ख़याल परेशान करता है…एकाध बार सोचा कि चिल्लाकर सबको बता दूँ उसका नाम…जाहिर कर दूँ कि इस छलावे के आसपास भी मत फटकना। ये तुम्हें अपने जादू से सम्मोहित करके छोड़ देगा। पलटकर देखेगा भी नहीं तुमको। लड़ते रहना तुम उसके रंग और खुशबू की यादों से…। पर किसी और को कुँए में धकेलना अच्छी बात है क्या? या शैतानी में ये भी किया जा सकता है। किसी का चैन और सुकून देखते न बनता हो, तो बददुआ दे दो उसे ‘जा तुझे प्यार हो जाय और वो भी किसी ऐसे से, जिसे तू पा न सके। तुझे चंदा से लगन लग जाय या आवारा बादलों से नेह लगा बैठे। दूर-दूर से देखकर तड़पे। पास भी पहुँच ना पाये।’

(निषिद्ध की आकांक्षा रचनाधर्मिता के लिए ऊर्जास्रोत है…ये शाप नहीं वरदान है मूरख!)

‘किस दुनिया में जी रही है तू लड़की। ये सब भरम है भरम।’ मेरा दिमाग बहुत बोलता है। लड़ता रहता है दिल से हर वक्त। पर जीतता दिल है। बोला दिमाग से- ‘क्या हुआ जो प्यार एक भ्रम है। यूँ तो ज़िंदगी भी एक छलावा है। यूँ तो दुनिया भी फानी है। शरीर नश्वर। जब सब मिट ही जाना है एक दिन, तो जी क्यों न लें इस पल को, जब एक नशा सा छाया है। वासंती मौसम में प्यार की बौछार हो रही है। होने दो। इसमें भीग जाने दो। जुकाम के डर से बारिश की खुशबू से मत भागो। जश्न मनाओ ज़िंदगी का रोज़-रोज़…ओ व्यापारियों, बहीखातों से ऊपर सिर उठाओ। कुँए के मेंढकों, बाहर निकलो, बहती नदियों में छलाँग लगाओ।’

(लगता है आज की रात फिर नींद नहीं आयेगी। ठीक है। ना आये। हम रात को जाने ही न देंगे। हम सुबह ही न होने देंगे।)

हम रतजगा करेंगे इंशा के साथ, मजाज़ के साथ। इंशा, इंशा, इंशा-

और तो कोई बस न चलेगा हिज्र के दर्द के मारों का|
सुबह का होना दूभर कर दें रस्ता रोक सितारों का|

clouds-picture

हमने बादल फैला दिए हैं आसमान पर। सितारों का रास्ता रोक दिया है। कौन कहता है कि असर सिर्फ पहले प्यार में होता है? जश्न मना लड़की कि तू प्यार में है।

(ये गाना ‘नींद लूटने वाले’ के लिए)

Advertisements

Single Post Navigation

24 thoughts on “कि तू प्यार में है

  1. क्या-क्या लिखती रहती हो! लग रहा है वायरस का असर कस के हुआ है।

  2. आपने सच कहा प्यार किसी से भी हो सकता है,इनदिनों मै अपनी स्कूल लाइफ जी रही हूँ तब सखियाँ होती थी, बहुत सी बातें और मिलने की चाह हमेशा होती थी ,आज मेरा बेटा कॉलेज जा रहा है और उसकी ही टीचर से दोस्ती हो गई है अब आलम ये है की हम मिलें नहीं दिनभर की बातें न करें तो तकलीफ होती है .

  3. Aradhana ji aapk lekh padh kar to aapse hi pyar ho gaya hai,bahut badhiya
    likhti hain 1 bar nahi kai bar padhane ka man chahta hai.

  4. ढेर सारी प्यारी-प्यारी बातें ….

  5. A poem of brooding instinct! khoobsurat kavita, magar ye shamat aayee kis par hai?

  6. ” प्यार एक नहीं, हज़ार बार हो सकता है। पहले प्यार को छोड़कर या पहले प्यार के रहते, दूसरा, तीसरा, चौथा प्यार हो सकता है। अलग-अलग समय में अलग-अलग से या एक ही आदमी से कई-कई बार हो सकता है। …

    Agree!!! 🙂

  7. कितनी तसल्ली मिली, कितनी तसल्ली मिली, कितनी तसल्ली मिली …. बता नहीं सकती…

    लगता था केवल एक हम ही पागल हैं … पर अब क्या … यदि हम पागल भी हैं तो अकेले नहीं …

    हम जैसे कईयों के दिल का हाल इतने बेहतरीन ढंग से कागज पर उतार देने के लिए शुक्रिया … बहुत बहुत शुक्रिया !!!

  8. @ मेरा दिमाग बहुत बोलता है। लड़ता रहता है दिल से हर वक्त। पर जीतता दिल है।

    बस दिल ऐसे ही जीतता रहे और दिमाग से करवाता रहे रतजगा…:)

  9. वासंती मौसम में प्यार की बौछार हो रही है। होने दो। इसमें भीग जाने दो। जुकाम के डर से बारिश की खुशबू से मत भागो। जश्न मनाओ ज़िंदगी का रोज़-रोज़…ओ व्यापारियों, बहीखातों से ऊपर सिर उठाओ। कुँए के मेंढकों, बाहर निकलो, बहती नदियों में छलाँग लगाओ।’

    खुद तो डूबे हैं बाकी क्यों बचें :):) गाना बहुत खूबसूरत है …. पूरी पोस्ट बहुत प्रवाह मयी …. गजब के भाव लिखती हो ।

  10. आराधना जी आप कुछ भी कहें, अपने विचारों एवं शब्दों को अपना मन रखने कैसे भी रखों और लिखों लेकिन प्यार सिर्फ और सिर्फ एक बार ही होता है तथा अपने लिए पता भी नहीं चलता। एक बार जब किसी से प्यार हो जाता है तो फिर वो एहसास कभी नहीं होता।

  11. आज की ब्लॉग बुलेटिन सनातन कालयात्री की ब्लॉग यात्रा – ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है … सादर आभार !

  12. सच कहें तो आपको प्यार की कद्र हैयिस ही नहीं 🙂

  13. कुछ भी लेकिन सीधे दिल से 🙂

  14. इंशा इंशा इंशा…..
    इंशाल्लाह प्यार मुकम्मल हो ही जाए……

    अनु

  15. गज़ब,,,,अद्भुत …लेखनी है कि बर्फ में फिसलती भावनाएँ….

  16. कमाल है जी…आपको आखिर हो ही गया…नहीं होना था नहीं होना था हो ही गया….चलो जो पिछले कुछ पोस्टों से झलक झलक कर भी आंखों से ओझल हो रहा था आखिर वो इस पोस्ट में जमकर बरस गया…मुबारक हो जी….अब उस निर्मोही को हो न हो..आपको तो है न जी अपने प्यार की कद्र ..बस इसी तरह उछलती कूदती रहिएगा…अब दिल का क्या करें जी..ये तो बच्चा है जी…बस यूं ही तड़पत रहता है….कोई न…बस यही चाहते हैं जी आपको मंजिल मिल जाए….वइसे कहते हैं प्यार को लेकर काफी कुछ….खैर अइसे ही सुबह मत होने दीजिएगा..औऱ हो जाए तो रात न होने दीजिएगा..बस यहूं कसरत करते रहिएगा..नहीं करिएगा तो प्यार है न कराने के लिए…शुभ रात्री..शब्बा खैर

  17. एक लड़की कब लकड़ी बन जाती है और वह भी सीलन भरी -उफ़!
    कुछ काम धाम करो लोगों को परेशान करना छोड़कर – इधर तुम और उधर मनीषा
    लोगों के दिन की चैन और रात की नीद उडाये हुए हैं -और दोनों ही अपने जार जवार के हैं ..
    अब बस भी करो बाबा -नहीं तो चपत खाने को तैयार रहो 🙂 बस अब और नहीं कहे देते हैं !
    मुला बात बर्दास्त के बाहर हो जायेगी -तब फिर यह मत कहना कि हम कहे नहीं थे …. 🙂

  18. अराधना (जी) के लिए फिलहाल ये गीत (फिल्म श्री 420 ) पेश है…

    दिल का हाल सुने दिलवाला
    सीधी सी बात ना मिर्च मसाला
    कहके रहेगा कहनेवाला
    दिल का हाल सुने दिलवाला

    छोटे से घर में गरीब की बेटी
    मैं भी हूँ माँ के नसीब की बेटी
    रंजो-गम बचपन के साथी
    आँधियों में जले जीवन बाती
    भूख ने है बड़े प्यार से पाला
    दिल का हाल सुने दिल वाला

    ग़म से अपने आज़ाद नहीं है
    खुश है मगर आबाद नहीं है
    पाँव में लेकिन बेड़ी पड़ी है
    टांग अड़ाता है दौलतवाला
    दिल का हाल सुने दिलवाला

    सुन लो मगर ये किसी से न कहना
    तिनके का ले के सहारा न बनना
    बिन मौसम मल्हार न गाना
    आधी रात को मत चिल्लाना
    वर्ना पकड़ लेगा पुलिस वाला
    दिल का हाल सुने दिलवाला ।।

    और देवमणि जी का यह ग़ज़ल भी…

    दिल-दौलत,घर-बार लुटाना अच्छा है
    इश्क़ में थोड़ा नाम कमाना अच्छा है

    चाँद के जैसा कोई हसीं मिल जाए तो
    जान-बूझकर धोखा खाना अच्छा है

    प्यार नहीं मिलता तो कोई बात नहीं
    आँखों में ये ख़्वाब सजाना अच्छा है

    गलियों-गलियों तेरे मेरे-चर्चे हैं
    इश्क़ में दीवाना हो जाना अच्छा है

    रूठ गई है नींद भी अपनी आँखों से
    यादों को मेहमान बनाना अच्छा है

    इस दुनिया से जीत नहीं सकते हम-तुम
    फिर भी दुनिया से टकराना अच्छा है

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: