आराधना का ब्लॉग

'अहमस्मि'- अपनी खोज में

ऊपर वाले

कोई रात के तीन बजे होंगे जब ऊपर से लड़ने-झगड़ने और चीज़ें तोड़ने-पटकने की आवाजें आने लगीं. मैं समझ गई कि टॉप फ्लोर वाले आज फिर झगड़ने के मूड में है. पहले “धम्म” से कोई चीज़ ज़मीन पर गिरी, फिर स्टील की चम्मच-प्लेटें गिरने की आवाजें और सबसे आखिर में “छन्नऽऽ” का शोर. मतलब ऊपर वाली लड़की भी मेरी तरह अपना गुस्सा बेचारी क्रॉकरी पर उतार रही है. ‘आज नींद आ चुकी’ मैंने सोचा और उठकर एक किताब पढ़ने लगी.

थोड़ी देर बाद दरवाजा खुलने और फिर बंद होने की आवाज़ आई. शायद लड़की ने लड़के को कमरे से बाहर निकाल दिया था. वो पहले तो धीरे-धीरे दरवाजा खटखटाकर दबी आवाज़ में “ओपन द डोर-ओपन द डोर” कहता रहा. करीब पन्द्रह मिनट बाद उसके सीढ़ियों से नीचे जाने की आवाज़ सुनाई दी. मैंने चैन की सांस ली, किताब उठाकर टेबल पर रखी, टेबल लैम्प बंद किया और सोने की कोशिश करने लगी. अचानक फिर दरवाजा खुलने की आवाज़ आई. लड़की बालकनी में खड़े होकर रो-रोकर लड़के से वापस आने के लिए कह रही थी. उसकी सारी बातें मुझे सीढ़ियों के रोशनदान से सुनाई दे रही थीं, जबकि वह अपनी समझ से काफी धीरे बोल रही थी. शायद लड़का नीचे गली में या सामने वाले पार्क में ही था. पांच मिनट में हाज़िर हो गया. मैं डर गई कि कहीं फिर से लड़ाई-झगड़ा न शुरू हो जाय. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

ऊपर वाले बच्चे अरुणाचल प्रदेश के हैं और मेरे मकान मालिक के प्रिय हैं. मकान मालिक की ख़ास बात यह है कि वे अपने कमरे नॉर्थ ईस्ट के छात्रों को देना पसंद करते हैं क्योंकि वे अपने से मतलब रखते हैं. ऊपर वाला कमरा लड़की ने किराए पर ले रखा है, उसका दोस्त आता-जाता रहता है और हफ्ते-दस दिन में उनके घमासान युद्ध की वजह से मेरी नींद खराब हो जाती है. कभी-कभी गुस्सा आता है, लेकिन फिर सोचती हूँ ‘जाने दो. वैसे ही प्यार के दुश्मन क्या कम हैं ज़माने में, जो मैं भी बन जाऊं.’ 🙂

दूसरे दिन शाम को मकान मालिक मेरे यहाँ आये, तो बातों ही बातों में पूछने लगे “आपको ऊपर वाली लड़की से कोई परेशानी तो नहीं है?” मैंने कहा “नहीं तो, क्यों?” “क्योंकि इसका दोस्त जहाँ रहता है (जाहिर है वह कमरा भी इन्हीं का है) वहाँ अक्सर इन दोनों में लड़ाइयाँ होती रहती थीं. आस-पड़ोस वाले काफी शिकायत करते थे.” “नहीं, ऐसी कोई ख़ास परेशानी तो नहीं.” कहते-कहते मेरे मुँह तक रात वाली बात आ ही गई थी. फिर जाने क्या सोचकर रुक गई. उन्होंने मानो खुद को विश्वास दिलाने के लिए पूछा, “पक्का?” मैंने जवाब दिया. “हाँ, पक्का!” उनको देखकर लगा जैसे उन्होंने चैन की सांस ली हो. जाते-जाते कहने लगे, “अगर थोड़ी बहुत परेशानी हो तो इग्नोर कीजियेगा. कुछ ही दिन पहले लड़की की माँ की कैंसर से डेथ हुयी है. बहुत स्ट्रेस में है बेचारी.”

उनके जाने के बाद मैं रात वाली घटना के बारे में दोबारा सोचने लगी. किसी की पृष्ठभूमि पता चल जाने के बाद कैसे हमारा नज़रिया उसके प्रति बदल जाता है. अब मुझे ऊपर वालों पर बिलकुल गुस्सा नहीं आ रहा था. वैसे आस-पड़ोस वालों की बातें नहीं सुननी चाहिए, लेकिन जब बातें अपने आप कानों में पड़ें तो क्या किया जाय 🙂

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8 thoughts on “ऊपर वाले

  1. chalo ek achchi padosan sabit hui tum aradhana

  2. There was a campaign some time ago RING THE BELL. yes its none of our business but we should keep our eyes and ears open for domestic abuse.

    • ये जहाँ की बात है वहां मारपीट नहीं होती. बस बर्तन पटके जाते हैं 🙂 ज़रा सी भी मारपीट का अंदाज़ा होते ही मैं पुलिस बुला लेती. इस मामले में हमारा मोहल्ला अच्छा है. यहाँ ऐसे झगड़ों में ज़्यादा अति होने पर कोई भी 100 नम्बर डायल कर देता है. अक्सर किसी न किसी ब्लाक में पुलिस आई रहती है.

      • वहां मारपीट नहीं होती. बस बर्तन पटके जाते हैं🙂 Breaking things, yelling screaming are part of intimate partner partner. You mentioned it is a routine pattern that every 10 days they have an explosion, it is called Acting-out/violent phase of cycle of violence followed by honeymoon phase when couple makes up apologizing and sweet nothings.
        https://girlsguidetosurvival.wordpress.com/all-about-relationships/cycle-of-violence/

        No matter how stressed the person is verbal leashing and breaking things is not a safe stress busting method, it only lowers the inhibition and gradually turns into physical violence. This couple needs to be educated on what healthy relationships look like. May be you can talk to the young woman and share these tools with her.
        https://girlsguidetosurvival.wordpress.com/all-about-relationships/take-a-quiz-are-you-abused/

        किसी की पृष्ठभूमि पता चल जाने के बाद कैसे हमारा नज़रिया उसके प्रति बदल जाता है. Agree with you, yes the context matters. But no matter what research shows breaking things and yelling screaming are the precursors to IPV.

        Peace,
        Desi Girl.

      • आपकी टिप्पणी पढ़कर अच्छा लगा. ये बात सच है कि झगड़े का इस स्तर तक जाना ठीक नहीं. आगे ध्यान दूँगी. अगर फिर हुआ तो बात करुँगी.

  3. अजय पाण्डेय on said:

    मेरा भी यही मानना है कि किसी पर कुछ टिप्पणी करने से पहले उसकी पृष्ठभूमि पर जरूर विचार करना चाहिए ।

  4. सच में प्यार के दुश्मन हज़ारों हैं दुनिया में… अच्छा किया जो कुछ नहीं कहा… हाँ अगर दोनों एक दुसरे को कोई नुक्सान पहुंचा रहे तो बात अलग है, हो सके तो कभी दोनों को प्यार से समझा के देखिएगा…

    कहीं कोई quote पढ़ा था… Always respect the people even if they are ignorant to you, you never know what situation they are in… ☺

  5. sahi hai kisis ke bare me jane bina to kuchh andaja nahi lagaya ja sakta ,lekin raat ko kisi ko pareshani ho sakti hai hamare jhagade se ye har kisi ko samjhana jaroori hai

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