आराधना का ब्लॉग

'अहमस्मि'- अपनी खोज में

My parents

वो जिन्होंने मुझे जन्म दिया, बनाया, अपनी गलतियों से सीखना सिखाया… अपनी चाल से चलना सिखाया… और… चले गए…मुझे अपनी यादों में डूबता-उतराता छोड़कर… इतनी मजबूती दी कि मैं टूट ना सकूँ… इतनी विनम्रता दी कि बड़ों के सामने झुक सकूँ … तो मैं खड़ी हूँ निश्चल, बिना इस अहंकार के कि मुझे कोई झुका नहीं सकता…

मैं अब भी उनकी यादों में डूबती-उतराती हूँ… तैरना नहीं आता… बस बहती जाती हूँ… पर बस, उनकी याद में … नहीं तो मैं अडिग हूँ, निश्चल, अपनी राह पर…

अम्मा-बाऊजी

दो कवितायें उनकी याद में

पर… … माँ

ग़लती करती

तो डाँट खाती

दीदी से भी

और बाबूजी से भी

सब सह लेती

पर

सह न पाती माँ

तुम्हारा एक बार

गुस्से से आँखें तरेरना

……………………..

कई तरह की

सज़ाएँ पायीं

मार भी खायी

कई बार

पर

नहीं भूलती माँ

तुम्हारी वो अनोखी सज़ा

कुछ भी न कहना

सभी काम करते जाना

एक लम्बी

चुप्पी साध लेना

……………………

बाबूजी का लाड़

अपने जैसा था

भाई का प्यार भी

अनोखा था

बहन के स्नेह का

कोई सानी नहीं

पर

इन सबसे बढ़कर था माँ

थपकी देकर

सुलाते हुये तुम्हारा

मेरे सिर पर

हाथ फेरना.

………………….

नमन पिता

जिसने मुझे

उँगली पकड़कर

चलना नहीं सिखाया

कहा कि खुद चलो

गिरो तो खुद उठो,

जिसने राह नहीं दिखाई मुझे

कहा कि चलती रहो

राह बनती जायेगी,

जिसने नहीं डाँटा कभी

मेरी ग़लती पर

लेकिन किया मजबूर

सोचने के लिये

कि मैंने ग़लत किया,

जिसने कभी नहीं फेरा

मेरे सिर पर हाथ

दुलार से

पर उसकी छाँव को मैंने

प्रतिपल महसूस किया,

जिसने खर्च कर दी

अपनी पूरी उम्र

और जमापूँजी सारी

मुझे पढ़ाने में

दहेज के लिये

कुछ भी नहीं बचाया,

आज नमन करता है मन

उस पिता को

जिसने मुझे

स्त्री या पुरुष नहीं

इन्सान बनकर

जीना सिखाया.

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13 thoughts on “My parents

  1. दोनों कविता पढ़ कर रोना आ गया…. मुझे भी अपनी माँ याद आ गयीं…..

  2. जब भी आपको पढता हूँ भाव टूट पड़ते हैं , अश्रु बहने लगते हैं, आप के लेखन में एक इमानदारी है , सच्चाई है और हम सब में धधकता एक कोमल सा मन है ….मेरी दुआ है कि आप बहुत आगे जाएँ और अपने माँ पिता का नाम रोशन करें ….

  3. Aaradhana…..G……kaaphi achha likhte hai aap……bhagwaan se prathana karta hun…..aap khoob tarkki kare……aur apne parents ke bataye rasto per chalkar unka naam roshan kare…….best of luck…….aapki kavita padhkar achha laga …….

  4. महेश सिन्हा on said:

    “पर उसकी छाँव को मैंने
    प्रतिपल महसूस किया,”

    नमन

  5. good,
    aasa laga jasha dill ke ghari ma dabi bat sabdoma, sa nikal aai ho….

  6. My eyes moistened after reading your kavita

  7. samanya sabdo me bhavo ki abhivyakti adutiya he

  8. यकीनन ये आपकी खुशकिस्मती है |
    माँ जी और बाबू जी को सादर नमन |

  9. Hakikat likhane ke liye madda chahiye.or apne se imandari.

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