आराधना का ब्लॉग

'अहमस्मि'- अपनी खोज में

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ओढ़े रात ओढ़नी बादल की

मैं अक्सर जो सोचती हूँ, कर डालती हूँ. कुछ समय से दिल्ली से मन ऊबा था. आठ महीनों से कहीं बाहर नहीं निकली थी. गर्मी ने और नाक में दम कर दिया… मन हुआ कहीं दूर बादलों की छाँव में चले जाने का, तो निकल लिए बाहर. दस घंटे का बस का सफर करके नैनीताल पहुँचे. इरादा तो रानीखेत जाने का था, पर नैनीताल में अधिक बारिश होने लगी, तो इरादा बदल दिया. आखिर जान तो प्यारी है ही ना… अपने पास कैमरा नहीं है, तो मोबाइल कैमरे से ही कुछ फोटो खींचे.

एक कविता भी लिख डाली…

…कविता क्या है…? कुछ काव्यमय पंक्तियाँ हैं… या पता नहीं… कुछ उसके जैसा ही …

… … … …

ओढ़े रात ओढ़नी बादल की

करती है अठखेलियाँ

पहाड़ों की चोटी पर,

चाँदनी से करने आँखमिचौली

छिप जाती है पेड़ों के झुरमुट में,

देखती है पलटकर

उसकी मेघ-ओढ़नी

अटक गयी है देवदार की फुनगी पर

और छूटकर  उतर रही है

धीरे-धीरे घाटी में.


My Tour To Devprayag

ई के महीने में दिल्ली की गर्मियों से बचने के लिये हम कुछ मित्रगण उत्तराखंड गये. हरिद्वार में राहत नहीं मिली तो सोचा कि देवप्रयाग चला जाय. अलकनंदा और भागीरथी नदियों के संगम पर स्थित इस तीर्थ का बहुत नाम सुना था. वहाँ पहुँचकर गर्मी से राहत तो नहीं मिली, पर पहाड़ों के सुन्दर दृश्यों ने दृष्टि को बांध लिया. उस समय अलकनंदा के ऊपरी इलाकों में बारिश होने से उसका पानी मटमैला सा हो गया था. इसलिये संगम पर दोंनो नदियों के पानी का अन्तर दूर से ही देखा जा सकता था. शाम की आरती के समय हम संगम पर गये. वहाँ पर बर्फ जैसे ठंडे पानी में हाथ-मुँह धोकर हम तृप्त हो गये. वह अनुभव अद्भुत था. मेरे पास कोई प्रोफ़ेशनल कैमरा नहीं था तो अपने मोबाइल कैम से ही कुछ फोटो लीं, जो इस पोस्ट के साथ लगा दी हैं.

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my tour to narmada dam

a bird's eye view

a bird's eye view

narmada river

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